अटल ने बनाया उत्तराखण्ड, मोदी ने संवारा और धामी ने विकास को दी नई रफ्तार

अटल ने बनाया उत्तराखण्ड, मोदी ने संवारा और धामी ने विकास को दी नई रफ्तार

मनीऑर्डर इकोनॉमी से औद्योगिक अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ता देवभूमि का सफर, निवेश, रोजगार, कनेक्टिविटी और सीमांत क्षेत्रों के विकास ने बदली प्रदेश की तस्वीर

देहरादून। कभी पलायन, सीमित औद्योगिक अवसरों और बुनियादी सुविधाओं की चुनौतियों से जूझने वाला उत्तराखण्ड आज विकास के नए प्रतिमान स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य स्थापना के 26वें वर्ष में प्रदेश की विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में आर्थिक गतिविधियों, आधारभूत संरचना, निवेश और रोजगार के अवसरों को विस्तार देने के प्रयास हैं। राज्योत्सव के मंच से केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भी प्रदेश की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने उत्तराखण्ड बनाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे संवारने का काम किया है।

निवेश के प्रस्ताव से धरातल तक पहुंचने की चुनौती

उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के लिए औद्योगिक निवेश को महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री के अनुसार, ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट में प्रदेश को 3.56 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले, जिनमें से लगभग एक लाख करोड़ रुपये के निवेश धरातल पर उतरकर औद्योगिक गतिविधियां शुरू कर चुके हैं। यह उपलब्धि निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने की दिशा में राज्य सरकार के प्रयासों को रेखांकित करती है।

वर्ष 2022 से अब तक प्रदेश की जीएसडीपी में लगभग 50 प्रतिशत वृद्धि और प्रति व्यक्ति आय में करीब 40 प्रतिशत बढ़ोतरी का आंकड़ा भी सामने रखा गया। पर्यटन क्षेत्र में 380 प्रतिशत वृद्धि का दावा प्रदेश की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था के विस्तार की ओर संकेत करता है।

कनेक्टिविटी से खुल रहे विकास के नए रास्ते

उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियों में सड़क, रेल और हवाई संपर्क विकास की सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में शामिल हैं। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर, चारधाम ऑल वेदर रोड और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना जैसी योजनाएं प्रदेश की कनेक्टिविटी को नया स्वरूप दे रही हैं।

 

केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाएं धार्मिक पर्यटन को सुविधाजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन तथा जमरानी, सौंग और किशाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजनाओं का भी विकास योजनाओं में विशेष स्थान है।

सीमांत गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की पहल

पलायन उत्तराखण्ड की लंबे समय से चली आ रही चुनौती है। सीमावर्ती गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार और स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर पैदा करना इस चुनौती से निपटने के लिए जरूरी है। वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत 270 करोड़ रुपये की लागत से 51 सीमांत गांवों में विकास कार्यों का उल्लेख किया गया। सरकार का उद्देश्य सीमांत गांवों को देश के अंतिम गांव के बजाय विकास के पहले गांव के रूप में स्थापित करना है।

महिला सशक्तीकरण और स्थानीय उत्पादों को बाजार

धामी सरकार की विकास रणनीति में महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी स्थान मिला है। सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण, सहकारी समितियों में 33 प्रतिशत आरक्षण और तीन लाख से अधिक लखपति दीदी तैयार करने की पहल का उल्लेख किया गया। हाउस ऑफ हिमालयाज और मिलेट मिशन के माध्यम से स्थानीय पहाड़ी उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। होम स्टे योजना भी ग्रामीण पर्यटन और स्वरोजगार से जुड़ी हुई है।

भर्ती व्यवस्था और कानूनों में बदलाव

युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता भी सरकार के प्रमुख एजेंडे में रही है। केंद्रीय गृह मंत्री ने बिना सिफारिश 35 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी दिए जाने का उल्लेख किया। नकल विरोधी कानून और समान नागरिक संहिता को राज्य सरकार की प्रमुख पहलों के रूप में प्रस्तुत किया गया।

विकसित उत्तराखण्ड का संकल्प

राज्योत्सव समारोह में 1475.31 करोड़ रुपये की 62 विकास योजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास, विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाओं को उत्तराखण्ड गौरव सम्मान और साहसी बच्चों को बाल वीरता पुरस्कार प्रदान करना भी विकास के साथ सामाजिक योगदान को पहचान देने का संदेश रहा।

उत्तराखण्ड के सामने अब विकास की गति बनाए रखने के साथ रोजगार का स्थायी सृजन, पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन पर प्रभावी नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन का संतुलित विस्तार जैसी बड़ी चुनौतियां हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार ने वर्ष 2047 तक विकसित उत्तराखण्ड बनाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि विकास का लाभ प्रदेश के दूरस्थ गांवों, किसानों, युवाओं, महिलाओं और आम नागरिकों तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचता है।

By admin