UPES में गूंजा विकसित भारत का संकल्प, 600 युवाओं ने जाना राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका
2047 के भारत की तस्वीर युवा गढ़ेंगे, UPES में 600 विद्यार्थियों से बोले मुकुल कानिटकर
यूथ कनेक्ट में स्वदेशी तकनीक, अनुसंधान और उद्यमिता पर जोर
हरिशंकर
देहरादून। वर्ष 2047 के विकसित भारत की आधारशिला आज के युवाओं की सोच, नवाचार और उद्यमशीलता से रखी जाएगी। युवाओं को केवल रोजगार पाने तक सीमित रहने के बजाय रोजगार सृजक बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। इसके लिए स्वदेशी तकनीक, अनुसंधान, नवाचार और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देना आवश्यक है। यह बात अभ्युदय–भारत राइजिंग फोरम की ओर से यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज (UPES) में आयोजित यूथ कनेक्ट कार्यक्रम में मुख्य वक्ता मुकुल कानिटकर ने कही।
कार्यक्रम में करीब 600 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं के साथ भारत के भविष्य, भारतीय मूल्यों, राष्ट्र निर्माण और वर्ष 2047 तक भारत की विकास यात्रा में उनकी भूमिका को लेकर संवाद स्थापित करना रहा।
मुकुल कानिटकर ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए भारतीयता के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत के विकास की यात्रा केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ज्ञान, अनुसंधान, तकनीकी क्षमता, सामाजिक जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी प्रतिभा और ऊर्जा का उपयोग देश की आवश्यकताओं के अनुरूप नए समाधान विकसित करने में करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में दुनिया तेजी से तकनीकी बदलावों के दौर से गुजरेगी। ऐसे में भारत के युवाओं को केवल विकसित देशों की तकनीकों के उपयोगकर्ता बनने के बजाय स्वयं नई तकनीक विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देकर स्वदेशी तकनीकी क्षमता विकसित करना विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार देने की सोच विकसित करें
मुख्य वक्ता ने विद्यार्थियों को करियर के पारंपरिक विकल्पों से आगे सोचने की प्रेरणा दी। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे अपनी क्षमताओं को पहचानें और उद्यमशीलता की सोच विकसित करें। केवल नौकरी प्राप्त करना ही सफलता का अंतिम लक्ष्य नहीं होना चाहिए। युवा ऐसे प्रयास करें, जिनसे वे स्वयं आगे बढ़ने के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछने और अपने विचार रखने का अवसर मिला। विद्यार्थियों ने राष्ट्र निर्माण, तकनीक, नवाचार, उद्यमिता और भविष्य की संभावनाओं से जुड़े सवाल किए। मुख्य वक्ता ने विद्यार्थियों के प्रश्नों पर संवाद करते हुए उन्हें अपने लक्ष्यों के प्रति स्पष्ट दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में UPES के रजिस्ट्रार श्री मनीष मदान, प्रो वाइस चांसलर डॉ. वीणा दत्ता, प्रो. डी.के. गुप्ता, विभाग प्रचारक श्री धनंजय जी तथा विवेकानंद हेल्थ मिशन के सर्जन डॉ. वैभव प्रताप सिंह सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ संकाय सदस्य एवं अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समन्वय में श्री लोकेन्द्र शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संयोजक डॉ. भालचंद्र शिंगण ने कार्यक्रम की योजना और तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ध्रुव कुमार ने किया।
करीब 600 विद्यार्थियों की सहभागिता ने कार्यक्रम को व्यापक स्वरूप प्रदान किया। यूथ कनेक्ट के माध्यम से युवाओं के बीच यह संदेश पहुंचाया गया कि वर्ष 2047 का भारत कैसा होगा, इसमें आज की युवा पीढ़ी की सोच, प्रतिभा, नवाचार और जिम्मेदारी की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। कार्यक्रम का समापन आत्मनिर्भर, नवाचारी और विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी के आह्वान के साथ हुआ।वैकल्पिक मुख्य शीर्षक:
