सेहत की पहली पाठशाला बनी आयुर्वेद की दिनचर्या

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मोहकमपुर स्थित पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय में आयुर्वेद एवं स्वास्थ्य जागरूकता कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवनशैली की जानकारी देते सुप्रसिद्ध आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. राजीव कुरेले एवं डॉ. रिचा शर्मा।

पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय में विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवन का मंत्र, विशेषज्ञों ने समझाया खानपान, योग और नियमित दिनचर्या का महत्व

कार्यशाला में क्या समझाया गया

• नियमित दिनचर्या का महत्व

• पौष्टिक एवं संतुलित भोजन की आवश्यकता

• योग और शारीरिक सक्रियता की भूमिका

• व्यक्तिगत स्वच्छता का महत्व

• रोगों से बचाव के सामान्य उपाय

• आयुर्वेद और स्वस्थ जीवनशैली का संबंध

• स्वास्थ्य के प्रति स्वयं जिम्मेदार बनने का संदेश

संवाददाता

देहरादून। पढ़ाई के बढ़ते दबाव और बदलती जीवनशैली के बीच बच्चों का स्वास्थ्य अब केवल घर की चिंता नहीं रह गया है। विद्यालय भी विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवन की आदतों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसी उद्देश्य से पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, आईआईपी, मोहकमपुर में विद्यार्थियों के लिए आयुर्वेद एवं स्वास्थ्य जागरूकता पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें आयुर्वेद विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को समझाया कि स्वस्थ रहने की शुरुआत बीमारी के उपचार से नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जीवनशैली और अच्छी आदतों से होती है।

कार्यशाला में सुप्रसिद्ध आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. राजीव कुरेले, एसोसिएट प्रोफेसर एवं शैक्षणिक अधीक्षक, मुख्य परिसर, आयुर्वेद संकाय, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, हर्रावाला, देहरादून तथा डॉ. रिचा शर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर, आयुर्वेद संकाय, मुख्य परिसर, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, हर्रावाला, देहरादून ने विशेषज्ञ वक्ता के रूप में विद्यार्थियों से संवाद किया।

बीमारी से पहले बचाव पर जोर

विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को बताया कि स्वास्थ्य के प्रति सजगता केवल बीमारी होने के बाद उपचार तक सीमित नहीं होनी चाहिए। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित दिनचर्या, संतुलित एवं पौष्टिक आहार, पर्याप्त विश्राम, व्यक्तिगत स्वच्छता और नियमित शारीरिक गतिविधि को जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है।

उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी दिनचर्या पर विशेष ध्यान देने तथा अनियमित खानपान और अस्वस्थ आदतों से बचने के लिए प्रेरित किया। विशेषज्ञों ने कहा कि जीवन में अपनाई गई छोटी-छोटी अच्छी आदतें आगे चलकर स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करती हैं।

आयुर्वेद को जीवन से जोड़ने की पहल

कार्यशाला का महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि विद्यार्थियों को आयुर्वेद की जानकारी केवल पुस्तकीय ज्ञान के रूप में नहीं दी गई, बल्कि उसे दैनिक जीवन से जोड़कर समझाया गया। दिन की शुरुआत, भोजन की आदतों, विश्राम, शारीरिक गतिविधि, योग और व्यक्तिगत स्वच्छता सहित स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।

विद्यार्थियों ने स्वास्थ्य, खानपान और दिनचर्या से संबंधित विभिन्न सवाल भी पूछे। विशेषज्ञों ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने तथा अपनी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया।

स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद का संदेश

आयुर्वेद दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य और समग्र जीवनशैली से जुड़े संदेश को विद्यार्थियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित यह कार्यक्रम विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा। विशेषज्ञों ने बताया कि आयुर्वेद का मूल दृष्टिकोण केवल रोग के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा और जीवनशैली को संतुलित बनाए रखने पर भी जोर देता है।

विद्यालय में आयोजित कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन के लिए नियमित दिनचर्या, उचित खानपान, योग, व्यायाम, स्वच्छता और पर्याप्त विश्राम को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी है।

बच्चों में विकसित हुई स्वास्थ्य की समझ

विद्यालय परिवार की ओर से विशेषज्ञों का आभार व्यक्त करते हुए कहा गया कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों में स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में उपयोगी हैं। कार्यशाला ने विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर दिया कि अच्छी सेहत किसी एक दिन की कोशिश का परिणाम नहीं, बल्कि नियमित और अनुशासित जीवनशैली का परिणाम है।

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