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नैनीताल में जन्मदिन मनाने के बहाने आई एक महिला की होटल के कमरे में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला हत्या में बदल गया। जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपनी पहचान छिपाकर महिला से संबंध बनाए और फिर वारदात को अंजाम देकर फरार हो गया। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

नैनीताल।(जनपक्ष आजकल )पहचान छिपाकर हिंदू नाम से दोस्ती करने और जन्मदिन मनाने के बहाने युवती को नैनीताल लाकर उसकी हत्या करने के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी ऋषभ तिवारी उर्फ इमरान को दोषी ठहराते हुए धारा 302 भादंसं के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने जुर्माना भी लगाया है और जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास का आदेश दिया है।

होटल में मिली थी युवती की लाश

अभियोजन के अनुसार, 16 अगस्त 2021 को थाना मल्लीताल में श्वेता शर्मा निवासी गौतमबुद्ध नगर ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि वह अपनी सहेली दीक्षा मिश्रा, उसके पति ऋषभ उर्फ इमरान और परिचित अल्तमस के साथ नैनीताल घूमने आई थीं। 14 अगस्त को सभी ने होटल में दो कमरे लिए थे।

16 अगस्त की सुबह दीक्षा का फोन नहीं उठने पर श्वेता और अल्तमस उसके कमरे में पहुंचे। दरवाजा खोलकर देखा तो दीक्षा बेड पर अचेत पड़ी थी, जबकि उसका पति ऋषभ वहां से फरार था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया।

पोस्टमार्टम में गला दबाकर हत्या की पुष्टि

17 अगस्त को हुई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि दीक्षा की मौत गला दबाने से दम घुटने के कारण हुई। डॉक्टरों ने न्यायालय में भी इसकी पुष्टि की। मृतका के मुंह और जीभ की स्थिति से स्पष्ट था कि हत्या की गई है।

सीसीटीवी में होटल से निकलता दिखा आरोपी

जांच के दौरान होटल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। फुटेज में घटना के बाद आरोपी को अटैची लेकर होटल से बाहर जाते हुए देखा गया। अभियोजन ने बताया कि आरोपी ने अपनी असली पहचान छिपाकर स्वयं को ब्राह्मण बताया था और जन्मदिन मनाने के बहाने दीक्षा को नैनीताल लाया था।

बेटी ने अदालत में दिया बयान

मृतका की 15 वर्षीय बेटी ने अदालत में बताया कि आरोपी उसकी मां को नैनीताल ले गया था। घटना के बाद वह ग्रेटर नोएडा स्थित फ्लैट पर पहुंचा और फोन का पासवर्ड पूछने लगा। बाद में उसे मां की हत्या की जानकारी मिली।

17 गवाह पेश, फॉरेंसिक साक्ष्य भी अहम

पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर आरोपी को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया। अभियोजन की ओर से 17 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट और डीएनए साक्ष्यों को भी न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सभी साक्ष्यों को ठोस मानते हुए आरोपी को दोषी करार दिया। साथ ही उत्तराखंड अपराध से पीड़ित सहायता योजना–2013 के तहत मृतका के परिजनों को आर्थिक सहायता देने के निर्देश जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को दिए गए।

By admin

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