
शीतकाल के लिए बंद हुए तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट, मक्कूमठ पहुंचेगी उत्सव डोली
चोपता में होगा पहला रात्रि प्रवास, 8 नवंबर को शीतकालीन गद्दीस्थल मर्कटेश्वर मंदिर में विराजेंगे बाबा
रुद्रप्रयाग।पंचकेदारों में तृतीय केदार के रूप में पूजनीय भगवान श्री तुंगनाथ धाम के कपाट गुरुवार को विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। समुद्र तल से करीब 3680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस पवित्र धाम में कपाट बंद होने के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। मंदिर परिसर को फूलों से आकर्षक ढंग से सजाया गया था। धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
मंदिर के पुजारी वेदपाठी अभिषेक मैठाणी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना एवं कपाट बंद करने की धार्मिक प्रक्रिया संपन्न कराई। इसके बाद भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली ने शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ के लिए प्रस्थान किया।
तीन पड़ावों में पहुंचेगी उत्सव डोली
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भगवान तुंगनाथ की उत्सव डोली का पहला रात्रि प्रवास चोपता में होगा। सात नवंबर को डोली भनकुण्ड पहुंचेगी, जबकि आठ नवंबर को शीतकालीन गद्दीस्थल श्री मर्कटेश्वर मंदिर, मक्कूमठ में विराजमान होगी। इसके बाद शीतकाल के दौरान भगवान तुंगनाथ की नियमित पूजा-अर्चना मक्कूमठ में ही संपन्न होगी।
भगवान शिव की भुजाओं की होती है पूजा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचकेदारों में तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ मंदिर में भगवान शिव की भुजाओं की पूजा की जाती है। समुद्र तल से लगभग 3680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर विश्व के सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित शिव मंदिरों में प्रसिद्ध है। यहां हर वर्ष देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
विशेष संयोग यह भी रहा कि वर्ष 2019 और 2025 में भी छह नवंबर को ही तुंगनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद हुए थे। इस वर्ष भी इसी तिथि को कपाट बंद किए गए।
इस अवसर पर मंदिर के पुजारी अभिषेक मैठाणी, अन्य पुजारीगण, ऊखीमठ कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक मनोज नेगी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, क्षेत्रवासी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
