वर्ल्ड हार्ट डे 2025 : धड़कन को न छोड़ें
डॉ राजीव कुरेले आयुर्वेद विशेषज्ञ
दिल—हमारी ज़िंदगी का सबसे अहम हिस्सा। यह सिर्फ़ एक अंग नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व की धुन है। जब तक यह धड़कता है, हम हैं। जब यह रुकता है, सब खत्म हो जाता है। लेकिन आज की तेज़-तर्रार ज़िंदगी में हम इसी दिल की अनदेखी करने लगे हैं। यही वजह है कि दुनिया को हर साल 29 सितंबर को याद दिलाना पड़ता है—विश्व हृदय दिवस आया है, दिल का ख्याल रखिए।
इस साल का विषय है—“धड़कन को न छोड़ें।” यह संदेश सीधा है, लेकिन गहराई से सोचें तो इसमें पूरी जीवन-दर्शन छिपा है।
क्यों ज़रूरी है ये दिन?
हर व्यक्ति जानता है कि दिल की बीमारी कितनी खतरनाक होती है। लेकिन व्यस्त दिनचर्या, भागदौड़ और लापरवाही हमें इसे हल्के में लेने पर मजबूर कर देती है। हम मानते हैं कि हार्ट प्रॉब्लम सिर्फ़ बुजुर्गों को होती है, जबकि सच्चाई इसके उलट है। अब तो युवा भी इस खतरे से अछूते नहीं हैं।
“धड़कन को न छोड़ें” इसीलिए कहता है कि लक्षणों को नज़रअंदाज़ मत कीजिए। छोटी-सी तकलीफ़ भी बड़े खतरे का संकेत हो सकती है।
दिल का मतलब सिर्फ़ शरीर नहीं
दिल के दो मायने हैं—
1. शारीरिक – यह अंग जो खून पंप करता है और शरीर को जीवित रखता है।
2. भावनात्मक – यह केंद्र जहाँ से प्यार, अपनापन और रिश्तों की गर्माहट निकलती है।
जब थीम कहती है “धड़कन को न छोड़ें”, तो इसका इशारा दोनों तरफ़ है। शारीरिक सेहत पर ध्यान देना ज़रूरी है, लेकिन उतना ही ज़रूरी है दिल को खुश रखना। तनाव, अवसाद और अकेलापन भी उतना ही खतरनाक है जितना अस्वस्थ खान-पान।
बदलती जीवनशैली और दिल की मुश्किलें
आज का इंसान हमेशा दौड़ में है। करियर, पैसे, नाम—हर चीज़ की होड़ है। इस भागदौड़ में हमने नींद खो दी, सुकून छोड़ दिया और अपनापन पीछे कर दिया। मोबाइल की स्क्रीन ने रिश्तों को छोटा कर दिया। जंक फूड ने थाली से पौष्टिकता छीन ली। काम का दबाव और तनाव ने दिमाग को और दिल को दोनों को थका दिया।
यानी बीमारी सिर्फ़ शरीर पर हमला नहीं कर रही, यह पूरी जीवनशैली को खोखला कर रही है।
दिल चाहता है
दिल को बहुत बड़ी मांग नहीं है। वह चाहता है कि आप—
सुबह थोड़ी देर टहलें, दौड़ें या योग करें।
थाली में हरी सब्ज़ियाँ और फल शामिल करें।
धूम्रपान और शराब जैसी आदतों से दूरी बनाएँ।
तनाव को कंट्रोल में रखें।
और सबसे अहम—अपनों के साथ वक्त बिताएँ, हँसें, खुश रहें।
क्योंकि दिल सिर्फ़ दवाइयों से नहीं, बल्कि मुस्कुराहटों से भी स्वस्थ होता है।
जब भी कोई हृदय संबंधी बीमारी है उसके लक्षण से रूबरू हो, किसी सुयोग आयुर्वेदिक से परामर्श अवश्य करें। निम्न औषधीय आयुर्वेद में बहुत ज्यादा लाभदायक बताई गई है।
1) हद्यणव रस, ) अर्जुनारिष्ट, 3) पुष्कर गुग्गुल 4) योगेंद्र रस, 5) रसोन क्षीर पाक, 5) अर्जुन क्षीरपाक, 6) गुग्गुलू आदि औषधीय हार्ट के लिए लाभदायकबताई गई है। आयुर्वेद में विशेष कर कहा है अम्ल द्रव्यम् हृदयानाम् अर्थात हृदय के अम्ल रस युक्त भोज्य पदार्थ हृदय के लिएलिए लाभदायक है। फलों में इसीलिए डैडी अर्थात अनार का रस, आंवले का रस अच्छा बताया है।
हृदय रोगों से बचाव एवं सुरक्षा के लिए प्राणायाम ध्यान धारणा समाधि का अभ्यास और महत्वपूर्ण बताया गया है। संपूर्ण लाभ के लिए एवं नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार का भी प्रयोग करना चाहिए। आयुर्वेद आहार नियम का पालन करना चाहिए। तनाव एक महत्वपूर्ण कारण है तनाव को दूर करने के लिए अपनी रुचि और मां को जो चीज अच्छी लगती हैं उन पर का कुछ समय अवश्य लगानाचाहिए। सामाजिक और सोशल लेने से परिवार संस्था से जुड़ने से मित्रों के साथ अपने अनुभव को शेयर करने से अपने दुख दर्द को शेयर करने से हम तनाव से दूर हो सकते हैं और जो हृदय रोगों से बचाने में बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण साबित होता है
इस साल की थीम क्यों महत्वपूर्ण है?
धड़कन को न छोड़ें” हमें याद दिलाती है कि दिल की आवाज़ सुनना ज़रूरी है।
छोटी-सी अनदेखी भी बड़ी कीमत ले सकती है।
सेहत, भावनाओं और रिश्तों में संतुलन लाना ही असली सुरक्षा है।
यह थीम हमें सतर्क भी करती है और प्रेरित भी करती है।
सिर्फ़ अपना नहीं, समाज का दिल भी
दिल की देखभाल सिर्फ़ व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं है। यह सामाजिक जिम्मेदारी भी है। अगर परिवार और समाज में अपनापन होगा, तो दिल की बीमारियाँ भी कम होंगी। अकेलापन और तनाव दिल को कमजोर करते हैं। इसलिए यह दिन रिश्तों को मज़बूत करने, एक-दूसरे के साथ खड़े रहने और समाज को दिल जैसा बड़ा बनाने का भी संदेश देता है।
विश्व हृदय दिवस हमें हर साल आईना दिखाता है। इस साल का आईना कह रहा है—“धड़कन को न छोड़ें।
यह नारा सिर्फ़ मेडिकल चेतावनी नहीं, बल्कि जीवन का मंत्र है। हर धड़कन की कदर कीजिए। क्योंकि धड़कन है तो जीवन है। और जीवन सिर्फ़ जीने के लिए नहीं, बल्कि खुशी, प्यार और अपनापन बाँटने के लिए है।
तो इस बार वर्ल्ड हार्ट डे पर एक वादा कीजिए—अपने दिल की सुनेंगे, उसकी देखभाल करेंगे और उसकी धड़कन को कभी थमने नहीं देंगे।
लेखक उत्तराखंड के जाने-माने सुप्रसिद्ध आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय हर्रावाला देहरादून में एसोसिएट प्रोफेसर है
