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गोखरू : छोटी-सी जड़ी-बूटी, बड़े-बड़े काम

डॉ राजीव कुरेले

देहरादून।भारत की धरती पर अनेक ऐसे पौधे पाए जाते हैं, जो देखने में साधारण लगते हैं लेकिन उनके औषधीय गुण असाधारण होते हैं। उन्हीं में से एक है – गोखरू (Tribulus terrestris)। खेत-खलिहानों, बंजर ज़मीन और रास्तों के किनारे फैली हुई यह बेलनुमा वनस्पति अक्सर लोगों के पैरों में चुभकर पहचान में आती है। मगर आयुर्वेद के लिए यही कांटेदार फल और पत्तियाँ स्वास्थ्य का खजाना हैं।

आयुर्वेदिक महत्व

आयुर्वेद शास्त्र में गोखरू को ‘गोक्षुर’ कहा गया है। प्राचीन ग्रंथों में इसे मूत्रविकार, गुर्दे की पथरी, वात-रोग, पुरुष रोग और हृदय रोगों में उपयोगी बताया गया है।

  • मूत्र विकार में राहत : पेशाब की जलन, रुकावट और संक्रमण को दूर करने में सहायक।
  • किडनी स्टोन : पत्थरी को घिसकर बाहर निकालने में मददगार।
  • हड्डियों व जोड़ों के लिए : सूजन और दर्द कम करने की क्षमता।
  • शारीरिक कमजोरी : ऊर्जा और बलवर्धक माना जाता है।
  • पुरुष स्वास्थ्य : वीर्य की गुणवत्ता बढ़ाने वाला माना गया है।

आधुनिक शोध

विज्ञान भी अब धीरे-धीरे इस जड़ी-बूटी के महत्व को स्वीकार कर रहा है। शोध बताते हैं कि गोखरू में सैपोनिन्स, फ्लेवोनॉयड्स और टैनिन्स पाए जाते हैं, जो एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और हार्मोन संतुलित करने वाले गुण रखते हैं। कई अध्ययनों में यह हृदय रोगियों और हाई ब्लड प्रेशर वालों के लिए लाभकारी साबित हुआ है।

सेवन के घरेलू उपाय

  • चूर्ण : गोखरू का पाउडर 3–5 ग्राम सुबह-शाम गुनगुने पानी या दूध के साथ लिया जा सकता है।
  • काढ़ा : सूखे फल और बीज को उबालकर छानकर पिया जाए तो मूत्र विकार में राहत देता है।
  • आयुर्वेदिक दवाएँ : गोक्षुरादि गुग्गुल, दशमूलारिष्ट और चंद्रप्रभा वटी में गोखरू प्रमुख घटक है।

(ध्यान दें – किसी भी दवा का सेवन विशेषज्ञ चिकित्सक की देखरेख में ही करें।)

सावधानियाँ

  • गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाएँ इसका उपयोग डॉक्टर से पूछकर ही करें।
  • डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की दवा लेने वाले मरीज सावधानी बरतें।
  • अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट में गड़बड़ी हो सकती है।

खेती और आर्थिक संभावनाएँ

उत्तर भारत के शुष्क और रेतीले इलाकों में गोखरू सहजता से उगता है। किसान यदि इसे औषधीय फसल के रूप में उगाएँ तो आयुर्वेदिक कंपनियों को सप्लाई करके अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। बाज़ार में इसकी लगातार मांग बनी रहती है।

गोखरू केवल एक साधारण झाड़ी नहीं, बल्कि प्राकृतिक औषधालय है। जो लोग इसके गुणों को जानते हैं, वे इसे शरीर की मजबूती और सेहत सुधारने के लिए वरदान मानते हैं। आयुर्वेद और आधुनिक शोध दोनों इसे उपयोगी बताते हैं। बस ज़रूरत है सही जानकारी और चिकित्सकीय परामर्श के साथ इसका इस्तेमाल करने की।

लेखक- डॉ राजीव कुरेले ,आयुर्वेद विशेषज्ञ एसोसिएट प्रोफेसर ,उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, हररावाला देहरादून उत्तराखंड

 

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