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हिप रिप्लेसमेंट एक कामयाब ऑपरेशन: पद्म श्री डॉ. संजय
हिप रिप्लेसमेंट 25 साल तक काम कर सकता है

 देहरादून(7 जुलाई 2025)।हिप रिप्लेसमेंट को लेकर मरीजों के मन में जो सबसे बड़ा सवाल होता है—”यह कितने साल चलेगा?”—इसका स्पष्ट और भरोसेमंद जवाब देश के वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन और पद्मश्री से सम्मानित प्रो. डॉ. बी. के. एस. संजय ने रविवार को उत्तरांचल ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन की संगोष्ठी में दिया। उन्होंने भरोसे के साथ कहा कि आज की आधुनिक सर्जरी और तकनीकों के जरिए किया गया हिप रिप्लेसमेंट 25 साल तक आराम दे सकता है, और कुछ मामलों में यह आजीवन भी टिक सकता है।

स्थानीय होटल हयात सेंट्रिक में उत्तरांचल ऑर्थोपीडिक एसोसिएशन द्वारा आयोजित हिप ट्रांसप्लांट विषयक संगोष्ठी का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उद्घाटन समारोह में एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. बी.के.एस. संजय, वर्तमान अध्यक्ष डॉ. एस.एन. सिंह और आयोजन सचिव डॉ. गौरव गुप्ता मौजूद रहे।

हिप रिप्लेसमेंट: आधुनिक चिकित्सा की ऐतिहासिक सफलता

डॉ. संजय ने प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल ‘द लांसेट’ का हवाला देते हुए कहा कि “हिप रिप्लेसमेंट 20वीं सदी की सबसे सफल सर्जरी में से एक है।” द लांसेट की गिनती विश्व की सर्वश्रेष्ठ मेडिकल जर्नलों में होती है, जो चिकित्सा शोध और प्रमाण आधारित रिपोर्टिंग के लिए विख्यात है।

उन्होंने बताया कि हिप रिप्लेसमेंट की नींव सर जॉन चार्नली द्वारा रखी गई थी, जिन्होंने लो-फ्रिक्शन आर्थ्रोप्लास्टी विकसित कर इस सर्जरी को व्यावहारिक और कारगर बनाया। वहीं बोन सीमेंट के आविष्कार ने हड्डियों और इंप्लांट के बीच स्थायित्व को संभव किया।

भारत में कम, विदेशों में ज्यादा आम है यह सर्जरी

डॉ. संजय ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत में हिप रिप्लेसमेंट अभी भी विकसित देशों की तुलना में कम प्रचलित है। इसके पीछे जागरूकता की कमी, सामाजिक भ्रांतियां और आर्थिक सीमाएं हैं। उन्होंने कहा कि भारत में रोगी का पहला सवाल यही होता है – “यह कितने साल चलेगा?”

डॉ. संजय ने कहा,

“अब तक के अनुभव से यह स्पष्ट है कि आधुनिक हिप रिप्लेसमेंट 15 से 25 वर्षों तक आरामदेह रहता है। और एक दुर्लभ किंतु सत्य घटना में, मोल्ड हिप रिप्लेसमेंट 65 वर्षों तक भी चला। अगर 1950 की तकनीकें ऐसा कर सकती हैं, तो आज की उन्नत तकनीकें जीवनभर चलने की संभावना क्यों नहीं रखतीं?”

मरीजों के लिए राहतभरी खबर: पालथी और स्क्वाट भी संभव

सामान्यत: यह माना जाता है कि हिप रिप्लेसमेंट के बाद भारतीय पारंपरिक क्रियाएं जैसे पालथी लगाना, स्क्वाट करना या ज़मीन पर बैठना संभव नहीं होता। लेकिन डॉ. संजय ने बताया कि अब ऐसी भी रिपोर्टें हैं जहाँ मरीज हिप रिप्लेसमेंट के बाद ये क्रियाएं सामान्य रूप से कर पा रहे हैं।

“सही इंप्लांट का चुनाव, सटीक तकनीक और मरीज की लगन से फिजियोथेरेपी के जरिए यह सब संभव है,” उन्होंने जोड़ा।

हिप रिप्लेसमेंट में हो रहा है लगातार सुधार

डॉ. संजय ने बताया कि वर्तमान समय में सिरेमिक, हाई क्रॉस-लिंक्ड पॉलीथीलीन, और कोबाल्ट-क्रोमियम एलॉय जैसे इंप्लांट मैटेरियल इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जो टिकाऊ और शरीर के लिए सुरक्षित हैं। साथ ही मिनिमली इनवेसिव सर्जरी, नेविगेशन सिस्टम, और रोबोटिक सर्जरी ने इस ऑपरेशन को और भी सटीक और कम जोखिम वाला बना दिया है।

राष्ट्र स्तर के विशेषज्ञों की रही मौजूदगी

संगोष्ठी में देश के अन्य प्रसिद्ध ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों ने भी हिप रिप्लेसमेंट से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। इनमें डॉ. एस.एस. मोहंती, डॉ. विजय कुमार, डॉ. बी.एस. मूर्ति, डॉ. मुदित खन्ना, डॉ. गौरव गुप्ता, डॉ. प्रवीण मित्तल और डॉ. हेमांशु कोचर शामिल रहे। सभी विशेषज्ञों ने एक स्वर में माना कि भारत में हिप रिप्लेसमेंट की जरूरत और संभावना दोनों बढ़ रही हैं, और समय की मांग है कि मरीजों को इस दिशा में जागरूक किया जाए।

भरोसेमंद सर्जरी, नया जीवन

इस संगोष्ठी ने स्पष्ट कर दिया कि हिप रिप्लेसमेंट न केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया है, बल्कि एक नया जीवन जीने का अवसर है। मरीजों को अब डरने की नहीं, बल्कि सही जानकारी लेकर निर्णय लेने की ज़रूरत है। पद्मश्री डॉ. संजय और अन्य विशेषज्ञों के अनुभव इस बात की गवाही देते हैं कि सही सर्जरी, सही समय और सही देखभाल से हिप रिप्लेसमेंट 25 साल या उससे भी ज्यादा टिक सकता है।

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