कांवड़ मेला 2025: मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने दिए सख्त निर्देश, तैयारियों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं
देहरादून (ब्यूरो): श्रावण मास के पावन अवसर पर होने वाले कांवड़ मेले की तैयारियों को लेकर सोमवार को सचिवालय में मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस दौरान मुख्य सचिव ने कांवड़ मेला-2025 को सुरक्षित, व्यवस्थित और श्रद्धालुओं के अनुकूल बनाने हेतु सभी विभागों और कार्यदायी संस्थाओं को सख्त निर्देश दिए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि मेला संचालन से संबंधित सभी तैयारियों को समयबद्ध रूप से पूरा किया जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर संबंधित विभाग व कार्यदायी संस्था पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नशे, उत्पात और बड़े डीजे पर रहेगा प्रतिबंध
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि मेला क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अवांछनीय गतिविधियों — जैसे नशा, उत्पात, हिंसक प्रवृत्ति को बढ़ावा देने वाले तत्वों पर कड़ी निगरानी रखी जाए और आवश्यकतानुसार कानूनी कार्यवाही की जाए। विशेष रूप से मेला क्षेत्र में बड़े डीजे साउंड पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए, जिससे श्रद्धालुजन को असुविधा न हो और धार्मिक वातावरण शांतिपूर्ण बना रहे।
साफ-सफाई और पेयजल आपूर्ति पर विशेष ध्यान
मुख्य सचिव ने नगर निकायों को निर्देश दिए कि मेला क्षेत्र में नियमित साफ-सफाई, शौचालयों की समुचित व्यवस्था, कचरा निस्तारण, और पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही जल संस्थान को निर्देशित किया गया कि पेयजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने फूड सेफ्टी विभाग को खानपान की दुकानों की नियमित जांच व गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि खाद्य पदार्थों में किसी भी तरह की मिलावट या अस्वास्थ्यकर वस्तुएं किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। इसके अतिरिक्त पूर्ति विभाग को निर्देशित किया गया कि मेला क्षेत्र में ओवररेटिंग पर विशेष निगरानी रखें और तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित करें।
स्नान घाटों पर सुरक्षा और स्वच्छता
मुख्य सचिव श्री बर्द्धन ने सिंचाई विभाग को निर्देशित किया कि हरिद्वार सहित सभी प्रमुख स्नान घाटों और पुलों पर बेहतर साफ-सफाई, जल निकासी, तथा समुचित बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था की व्यवस्था की जाए। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए आवश्यक स्थायी व अस्थायी निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए गए।
यातायात और भीड़ प्रबंधन की तैयारियाँ पूर्णता की ओर
बैठक में हरिद्वार के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने कांवड़ मेले के संचालन की विस्तृत योजना प्रजेंटेशन के माध्यम से प्रस्तुत की। इसमें यातायात व्यवस्था, रूट डायवर्जन, पार्किंग की उपलब्धता, श्रद्धालुओं की आवाजाही, चिकित्सा व्यवस्था एवं सुरक्षा उपायों की जानकारी दी गई।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने अवगत कराया कि मेला क्षेत्र को 16 सुपर जोन, 37 जोन और 134 सेक्टरों में बांटा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित नियंत्रण एवं राहत कार्य किए जा सकें। उन्होंने यह भी बताया कि स्थायी व अस्थायी निर्माण कार्यों की आवश्यकता और बजट की जानकारी शासन को भेज दी गई है।
मेला तिथियाँ और महत्वपूर्ण पड़ाव
-
कांवड़ मेला अवधि: 11 जुलाई से 23 जुलाई 2025
-
पंचक अवधि: 13 जुलाई से 17 जुलाई
-
डाक कांवड़: 20 जुलाई से 23 जुलाई
-
श्रावण शिवरात्रि (जलाभिषेक): 23 जुलाई
इन तिथियों को ध्यान में रखते हुए ट्रैफिक, स्वच्छता, जलापूर्ति, सुरक्षा, चिकित्सा और जनसुविधा संबंधी सभी इंतज़ाम पिछले वर्षों की तुलना में और बेहतर तरीके से सुनिश्चित किए जा रहे हैं।
प्रदेश के तीन प्रमुख जनपदों की भूमिका अहम
देहरादून, पौड़ी और टिहरी जनपदों के अधिकारियों ने भी बैठक में प्रतिभाग कर अपने-अपने क्षेत्रों में की जा रही व्यवस्थाओं एवं बजटीय आवश्यकताओं से मुख्य सचिव को अवगत कराया। उन्होंने मेला अवधि में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए संबंधित क्षेत्रों में पुलिस, स्वास्थ्य, परिवहन, जल संस्थान, नगर निकाय और राजस्व विभाग के बीच समन्वय बनाए रखने का संकल्प दोहराया।
वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में बनी समन्वय की रूपरेखा
बैठक में अपर पुलिस महानिदेशक वी मुरुगेशन, गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय, महानिरीक्षक के. एस. नगन्याल, जिलाधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार, देहरादून, पौड़ी व टिहरी, तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, निगरानी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन की रणनीति पर विशेष चर्चा हुई।
मुख्य सचिव का दो टूक संदेश: श्रद्धालुओं की आस्था के साथ कोई समझौता नहीं
मुख्य सचिव ने बैठक के अंत में सभी विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि “श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। मेले की व्यवस्थित रूप से समाप्ति ही सबकी जिम्मेदारी है।”
