किसानों की समस्याओं पर फूटा गुस्सा
भारतीय किसान संघ ने सौंपा ज्ञापन, शीघ्र समाधान न होने पर जिला मुख्यालयों पर धरना की चेतावनी
देहरादून, 9 सितम्बर ( सुकर्मपाल सिंह राणा।
भारतीय किसान संघ के केंद्रीय नेतृत्व के आह्वान पर मंगलवार को प्रदेशभर के सभी विकासखण्डों में किसानों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने विकासखंड अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो आगामी चरण में जिला मुख्यालयों पर बड़े पैमाने पर धरना-प्रदर्शन होगा।


किसानों की प्रमुख मांगें
- उत्तर प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में भी नलकूपों के लिए निशुल्क बिजली उपलब्ध कराई जाए।
- अतिवृष्टि व बाढ़ से नष्ट फसलों का सर्वे कराकर क्षतिपूर्ति दिलाई जाए।
- गन्ना फसल की लागत को देखते हुए ₹500 प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य घोषित कर अक्टूबर के पहले सप्ताह से चीनी मिलें चालू कराई जाएं।
- बरसात में टूटे-फूटे ग्रामीण संपर्क मार्गों की मरम्मत तत्काल हो।
- किसानों को बुवाई से पहले पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए।
- बरसात के मौसम में फैलने वाली बीमारियों से निपटने को गांवों में डॉक्टरों की तैनाती व कीटनाशक छिड़काव सुनिश्चित हो।
- वृद्धावस्था व दिव्यांग पेंशन की रुकी हुई किस्तें शीघ्र चालू की जाएं।
- जीएसटी का लाभ पूरे राज्य में समान रूप से लागू किया जाए।
आधा दर्जन जिलों में हुआ आंदोलन
भारतीय किसान संघ के बैनर तले उधमसिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, नैनीताल और चंपावत सहित विभिन्न जिलों के विकासखंडों में किसानों ने धरना-प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में किसान ज्ञापन सौंपने के लिए ब्लॉक मुख्यालयों पर पहुंचे।
पदाधिकारियों ने जताई नाराजगी
इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष कुशल पाल सिंह, प्रदेश महामंत्री चौधरी कुंवरपाल सिंह, प्रदेश कोषाध्यक्ष मास्टर नरेश नौटियाल, कार्यालय मंत्री मंगतू सिंह, उपाध्यक्ष सतपाल राणा, प्रबल सिंह नेगी, मंत्री ममता राणा, मास्टर चेतराम नायक, चार प्रमुख नितिन शाही सहित अनेक नेताओं ने किसानों की समस्याओं को गंभीर बताते हुए सरकार से तत्काल पहल करने की मांग की।
धरना-प्रदर्शन में जिला अध्यक्ष, मंत्री, कार्यसमिति सदस्य, महिला कार्यकर्ता और हजारों किसानों ने भागीदारी की। किसान नेताओं ने कहा कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो जिला मुख्यालय स्तर पर उग्र आंदोलन होगा।
किसानों का कहना है कि सरकार को राहत पैकेज और योजनाओं की घोषणा करने के बजाय धरातल पर ठोस कार्रवाई करनी होगी, तभी हिमालयी प्रदेश के किसानों की स्थिति सुधरेगी।
