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हिमालय दिवस पर पथरीबाग में मंथन

अस्थिर होता हिमालय : नैसर्गिक संरक्षण, समावेशी विकास और समाधान विषय पर विचार गोष्ठी

देहरादून, 9 सितम्बर 2025 ( संवाददाता)।
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में हिमालय दिवस 2025 के अवसर पर मंगलवार को पथरीबाग स्थित श्री गुरु राम राय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के सभागार में “अस्थिर होता हिमालय – नैसर्गिक संरक्षण, समावेशी विकास एवं समाधान” विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम उत्तरांचल उत्थान परिषद की पहल पर परिषद और श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रदीप सिंह ने की, जबकि संचालन परिषद के महामंत्री राजेश थपलियाल ने किया। गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पी.एस. नेगी, मुख्य वक्ता पर्यावरणविद् सचिदानंद भारती और विशिष्ट अतिथि ग्राफिक एरा पर्वतीय विश्वविद्यालय के विचार नवाचार एवं पर्यावरण केंद्र की निदेशक डॉ. रीमा पंत मौजूद रहीं।

दीप प्रज्वलन से हुआ शुभारंभ

मुख्य अतिथि डॉ. पी.एस. नेगी ने अन्य गणमान्य अतिथियों और परिषद पदाधिकारियों के साथ संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में भागीदारी की।

कार्यक्रम की शुरुआत में परिषद महामंत्री ने सभी अतिथियों का परिचय कराया और उन्हें बैज अलंकरण, स्मृति चिन्ह और शॉल भेंट कर स्वागत किया गया। स्वागत भाषण में परिषद मंत्री यशोदानंद कोठियाल ने परिषद की विभिन्न गतिविधियों — संस्कार केंद्रों, सेवा प्रकल्पों और लाइब्रेरी संचालन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि परिषद प्रतिवर्ष कई सामाजिक एवं पर्यावरणीय कार्यक्रम आयोजित करती है और इनमें हिमालय दिवस विशेष महत्व रखता है।

सचिदानंद भारती ने रखे ठोस तर्क

मुख्य वक्ता पर्यावरणविद् सचिदानंद भारती ने पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से उत्तराखंड में पर्यावरण एवं जल संरक्षण के पारंपरिक और अभिनव प्रयोगों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिमालयी राज्यों में समय-समय पर आपदाएं आती रही हैं, लेकिन आज नुकसान कहीं अधिक क्यों हो रहा है, इस पर गहन विचार जरूरी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक हलचलें सामान्य प्रक्रिया हैं, लेकिन मानवजनित हस्तक्षेपों ने इन आपदाओं को विकराल बनाया है। उन्होंने चेताया कि विकास योजनाओं में यदि पर्यावरण और जल संरक्षण की अनदेखी हुई, तो पूरे हिमालयी क्षेत्र का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

डॉ. नेगी ने दिया वैज्ञानिक विश्लेषण

वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. पी.एस. नेगी ने हिमालय के भूगर्भीय निर्माण, भूकंपीय गतिविधियों और हाल के वर्षों में भारी वर्षा, ग्लेशियर टूटने व बादल फटने की घटनाओं पर वैज्ञानिक प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि हिमालय की भू-आकृति के अनुरूप हमें सड़क और निर्माण कार्य करने होंगे। प्रकृति की अनदेखी कर बनाई गई योजनाएं ही आपदा को आमंत्रित करती हैं।
नेगी ने उत्तरांचल उत्थान परिषद की पहल की सराहना करते हुए इसे जनजागरूकता की दिशा में सार्थक प्रयास बताया।

युवाओं और समाजसेवियों की भागीदारी

कार्यक्रम में देवभूमि विचार मंच के संयोजक पृथ्वीधर काला, छात्र अनिल नेगी समेत कई युवाओं ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने युवाओं को पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

अंत में सह संयोजक नरेश चन्द्र कुलाश्री ने मुख्य अतिथि, अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार जताते हुए कहा कि हिमालय की स्थिरता और सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

मंच पर मौजूद रहे ये हस्तियां

बैठक में परिषद उपाध्यक्ष ऊषा रावत, मंत्री यशोदानंद कोठियाल, धर्मानंद उनियाल, आनंद सिंह रावत, कार्यकारिणी सदस्य नरेश चन्द्र कुलाश्री, विपुल जोशी, सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मी प्रसाद जायसवाल, उमा दत्त सेमवाल, पृथ्वीधर काला समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। विचार गोष्ठी से यह संदेश सामने आया कि हिमालय का भविष्य केवल वैज्ञानिक शोध या सरकारी योजनाओं पर नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक चेतना और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता पर भी निर्भर करता है।

By admin

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