सुरक्षित क्लिक, सुरक्षित बचपन अभियान के तहत कुल्लू पुलिस ने विद्यार्थियों को साइबर अपराधों के प्रति किया जागरूक

कुल्लू। बच्चों की सुरक्षा केवल वास्तविक दुनिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के बीच उनकी डिजिटल सुरक्षा भी बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। इसी उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), कुल्लू की ओर से चलाए जा रहे *सुरक्षित बचपन अभियान* के अंतर्गत 30 अक्टूबर 2026 को भारत भारती वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, ढालपुर में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान कुल्लू पुलिस ने विद्यार्थियों को ऑनलाइन दुनिया में मौजूद खतरों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी।

कार्यक्रम में माननीय श्री अमित मण्डयाल, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश-II, कुल्लू की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित इस्तेमाल के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें साइबर अपराधों की पहचान और उनसे बचाव के लिए आवश्यक जानकारी प्रदान करना रहा।

ऑनलाइन ग्रूमिंग और साइबर बुलिंग के प्रति किया जागरूक

जागरूकता सत्र के दौरान कुल्लू पुलिस ने विद्यार्थियों को ऑनलाइन ग्रूमिंग, साइबर बुलिंग, सेक्सटॉर्शन और ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर साइबर अपराधों के बारे में विस्तार से बताया। विद्यार्थियों को समझाया गया कि साइबर अपराधी किस प्रकार सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से बच्चों से संपर्क स्थापित कर उनका विश्वास जीतने का प्रयास करते हैं। इसके बाद निजी जानकारी, तस्वीरों और अन्य व्यक्तिगत सामग्री का दुरुपयोग कर उन्हें परेशान अथवा ब्लैकमेल किया जा सकता है।

पुलिस ने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे इंटरनेट पर किसी अनजान व्यक्ति से बातचीत करते समय सावधानी बरतें और अपनी निजी जानकारी, मोबाइल नंबर, पता तथा तस्वीरें किसी के साथ साझा करने से बचें। किसी भी प्रकार के ऑनलाइन उत्पीड़न या धमकी की स्थिति में घबराने अथवा चुप रहने के बजाय अभिभावकों, शिक्षकों या संबंधित पुलिस अधिकारियों को तुरंत जानकारी दें।

AI और डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग की दी जानकारी

कार्यक्रम में फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एवं डीपफेक तकनीक के माध्यम से होने वाले दुरुपयोग पर भी विशेष चर्चा की गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके किसी व्यक्ति की तस्वीर, आवाज और वीडियो में बदलाव कर भ्रामक सामग्री तैयार की जा सकती है। ऐसी सामग्री का इस्तेमाल किसी की छवि खराब करने, धोखाधड़ी करने और ब्लैकमेलिंग के लिए भी किया जा सकता है।

इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन गेमिंग के दौरान होने वाले संभावित जोखिमों के बारे में भी विद्यार्थियों को सचेत किया गया। उन्हें अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार नहीं करने, संदिग्ध लिंक पर क्लिक नहीं करने और ऑनलाइन गेमिंग के दौरान व्यक्तिगत एवं वित्तीय जानकारी साझा नहीं करने की सलाह दी गई।

साइबर अपराध होने पर 1930 पर करें शिकायत

सत्र के दौरान विद्यार्थियों को साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने के लिए उपलब्ध सरकारी व्यवस्थाओं की जानकारी भी दी गई। उन्हें राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल www.cybercrime.gov.in और साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 के बारे में बताया गया।

पुलिस ने विद्यार्थियों को समझाया कि साइबर अपराध का शिकार होने की स्थिति में समय रहते शिकायत करना आवश्यक है। ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग, फर्जी प्रोफाइल या निजी तस्वीरों के दुरुपयोग जैसी घटनाओं को छिपाने के बजाय उचित माध्यम से शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

जागरूकता ही बच्चों की डिजिटल सुरक्षा का आधार

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि इंटरनेट का इस्तेमाल ज्ञान, शिक्षा और संवाद के लिए उपयोगी है, लेकिन इसके साथ सावधानी बरतना भी जरूरी है। बच्चों को स्वयं जागरूक रहने के साथ अपने मित्रों और परिवार के सदस्यों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कुल्लू और कुल्लू पुलिस की इस पहल का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित डिजिटल वातावरण उपलब्ध कराने, साइबर अपराधों के प्रति उनकी समझ विकसित करने तथा किसी भी अप्रिय स्थिति में सहायता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

कुल्लू पुलिस ने बच्चों की सुरक्षा, साइबर जागरूकता और सुरक्षित समाज के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए संदेश दिया कि सुरक्षित क्लिक ही सुरक्षित बचपन की नींव है। जागरूक बच्चे ही सुरक्षित भविष्य का निर्माण करेंगे।

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