हैदराबाद के ईएसआईसी मॉडल से उत्तराखंड को मिल सकती है नई राह

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हैदराबाद के सनतनगर स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था का अवलोकन करते उत्तराखंड से पहुंचे मीडिया प्रतिनिधि।

उत्तराखंड के पहाड़ों में ‘चलता-फिरता अस्पताल’ बनेगी 5जी एंबुलेंस!

हैदराबाद के ईएसआईसी मॉडल से उत्तराखंड को मिल सकती है नई राह

दुर्गम गांवों से देहरादून, ऋषिकेश और हल्द्वानी तक मरीज पहुंचने के इंतजार में नहीं थमेगी विशेषज्ञ चिकित्सा—रास्ते में ही डॉक्टरों से जुड़ने की तकनीक पर जोर

हैदराबाद से गिरीश जोशी की रिपोर्ट

हैदराबाद। उत्तराखंड के पहाड़ों में बीमारी से बड़ी चुनौती कई बार अस्पताल तक पहुंचने की दूरी बन जाती है। सड़क दुर्घटना हो, हार्ट अटैक या स्ट्रोक—दुर्गम क्षेत्रों से मरीज को बड़े अस्पताल तक पहुंचाने में लगने वाला समय उपचार की राह में सबसे बड़ी बाधा बन जाता है। ऐसे में हैदराबाद के ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, सनतनगर में देखी गई आधुनिक चिकित्सा तकनीक उत्तराखंड के लिए उम्मीद की एक नई खिड़की खोलती है। 5जी से जुड़ी एंबुलेंस की अवधारणा पहाड़ों में आपात चिकित्सा का चेहरा बदल सकती है।

पहाड़ में मरीज, विशेषज्ञ डॉक्टर की नजर

उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां मैदानी राज्यों से बिल्कुल अलग हैं। कई गांवों से जिला अस्पताल अथवा उच्च स्तरीय चिकित्सा केंद्र तक पहुंचने में घंटों लग जाते हैं। ऐसे में यदि एंबुलेंस में मौजूद चिकित्सा उपकरण मरीज की जरूरी जानकारी विशेषज्ञ चिकित्सकों तक पहुंचा सकें और रास्ते में ही चिकित्सकीय मार्गदर्शन उपलब्ध हो सके तो आपात उपचार की पूरी प्रक्रिया को नई गति मिल सकती है।

मरीज एंबुलेंस में होगा, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर की नजर उसके साथ रहेगी।

यही विचार उत्तराखंड के लिए सबसे महत्वपूर्ण हो सकता है।

दुर्गम पहाड़ों के लिए क्यों जरूरी है यह तकनीक?

उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, बागेश्वर और टिहरी जैसे पर्वतीय जिलों में कई स्थानों से गंभीर मरीज को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाने में लंबा समय लगता है। मौसम, भूस्खलन, सड़क अवरोध और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां इस चुनौती को और बढ़ा देती हैं।

ऐसे में हर गंभीर मरीज के साथ विशेषज्ञ चिकित्सक भेजना संभव नहीं है। लेकिन तकनीक के माध्यम से विशेषज्ञ सलाह मरीज तक पहुंचाई जा सकती है।

5जी आधारित एंबुलेंस इसी दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती है। एंबुलेंस को बड़े चिकित्सा केंद्रों से जोड़ा जाए तो मरीज की स्थिति की जानकारी अस्पताल तक पहले पहुंच सकती है और उसके पहुंचने से पहले जरूरी तैयारियां की जा सकती हैं।

गोल्डन टाइम’ बचाने की उम्मीद

हार्ट अटैक, स्ट्रोक और गंभीर दुर्घटनाओं में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। पहाड़ों में अस्पताल पहुंचने में लगने वाला अतिरिक्त समय कई बार चुनौती बढ़ा देता है।

5जी तकनीक आधारित आपात चिकित्सा व्यवस्था का उद्देश्य यह हो सकता है कि अस्पताल की विशेषज्ञ टीम मरीज के पहुंचने का इंतजार न करे, बल्कि रास्ते में ही उसकी स्थिति से जुड़ी जानकारी हासिल करती रहे।

इससे अस्पताल के आपात विभाग में पहले से तैयारी करने और आवश्यक विशेषज्ञों को अलर्ट करने की संभावना बढ़ सकती है।

देहरादून-ऋषिकेश-हल्द्वानी बनें ‘मेडिकल हब’, पहाड़ जुड़े तकनीक से

उत्तराखंड में इस मॉडल को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। पर्वतीय क्षेत्रों की चयनित एंबुलेंस को देहरादून, ऋषिकेश और हल्द्वानी जैसे प्रमुख चिकित्सा केंद्रों से तकनीकी रूप से जोड़ा जा सकता है।

दूरस्थ क्षेत्र से निकलने वाली एंबुलेंस के साथ ही मरीज की जानकारी विशेषज्ञ केंद्र तक पहुंचती रहे—तो पहाड़ और विशेषज्ञ चिकित्सा के बीच की दूरी काफी हद तक तकनीक के सहारे कम की जा सकती है।

सिर्फ एंबुलेंस नहीं, ‘मोबाइल आईसीयू’ की दिशा

भविष्य में ऐसी व्यवस्था को और विकसित कर एंबुलेंस को अत्याधुनिक उपकरणों, प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ और विशेषज्ञ चिकित्सकीय निगरानी से लैस किया जा सकता है। इससे यह सामान्य परिवहन वाहन की बजाय मोबाइल आपात चिकित्सा इकाई के रूप में काम कर सकती है।

हैदराबाद से उत्तराखंड तक एक बड़ा संदेश

सनतनगर के ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा शिक्षा और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को करीब से देखने के बाद सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही सामने आता है कि स्वास्थ्य सेवाओं का भविष्य केवल बड़े अस्पताल बनाने में नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक को मरीज तक पहुंचाने में भी है।

उत्तराखंड के लिए यह पहल इसलिए और महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां स्वास्थ्य सुविधा का सवाल केवल अस्पतालों की संख्या का नहीं, बल्कि दुर्गम गांव से विशेषज्ञ डॉक्टर तक समय पर पहुंच का भी है।

अगर तकनीक के माध्यम से पहाड़ के मरीज को बड़े अस्पताल के विशेषज्ञ से रास्ते में ही जोड़ा जा सके, तो यह उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है।

जब विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह तकनीक के जरिए एंबुलेंस तक पहुंच सकती है, तो पहाड़ का मरीज विशेषज्ञ चिकित्सा से दूर क्यों रहे?

उत्तराखंड के लिए संभावित फायदे

 दूरस्थ मरीज को रास्ते में विशेषज्ञ मार्गदर्शन

 बड़े अस्पतालों से एंबुलेंस का तकनीकी जुड़ाव

हार्ट अटैक और स्ट्रोक में समय बचाने की संभावना

अस्पताल पहुंचने से पहले उपचार की तैयारी

 दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सा की पहुंच

पहाड़ और विशेषज्ञ डॉक्टर के बीच तकनीक बनेगी सेतु

 

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