विश्व हिंदू परिषद – मातृशक्ति दुर्गा वाहिनी का स्थापना दिवस, मातृशक्ति के उत्थान का संकल्प
चंद्रबनी श्री गौतम कुंड मंदिर में हुआ भव्य आयोजन
देहरादून, 28 अगस्त, देहरादून-दक्षिण के चंद्रबनी स्थित श्री गौतम कुंड मंदिर प्रांगण गुरुवार की शाम मातृशक्ति की ऊर्जा और उत्साह से सराबोर हो उठा। अवसर था विश्व हिंदू परिषद –स्थापना दिवस का।
कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत पूजा-अर्चना और मंगलाचरण के साथ हुआ। उपस्थित मातृशक्ति कार्यकर्ताओं ने मंदिर परिसर में ‘भारत माता की जय’ और ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष के साथ माहौल को ओजस्वी बना दिया।
मुख्य वक्ता श्रीमती नीता कपूर जी, प्रांत संयोजिका, मातृशक्ति – विश्व हिंदू परिषद ने अपने संबोधन में कहा कि “नारी जब संस्कारों और शक्ति दोनों से संपन्न होकर समाज में उतरती है, तो वह न केवल परिवार को संवारती है बल्कि राष्ट्र की दिशा और दशा भी तय करती है।” उन्होंने मातृशक्ति की भूमिका को केवल घर की सीमाओं से बाहर निकालकर समाज सेवा और राष्ट्र जागरण से जोड़ने पर जोर दिया।
विशिष्ट अतिथि श्रीमती नीलम त्रिपाठी जी, प्रांत सह-संयोजिका ने कहा कि आज आवश्यकता है कि हम अपनी युवा पीढ़ी को सनातन मूल्यों और संस्कारों से जोड़ें। उन्होंने कहा कि दुर्गा वाहिनी की बहनें केवल संगठन की शक्ति ही नहीं, बल्कि समाज की धड़कन भी हैं।
मंच संचालन की जिम्मेदारी दीपाली शुक्ला, विभाग सह-संयोजिका दुर्गा वाहिनी ने बड़े आत्मीय और सजीव अंदाज़ में निभाई। उन्होंने वक्ताओं का परिचय और कार्यक्रम की शृंखला को अचार-पद्धति के साथ इस तरह प्रस्तुत किया कि पूरा वातावरण अनुशासन और आत्मीयता से भर गया।
समारोह में कुसुम भट्ट ने भक्ति-गीत प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। गीत की पंक्तियों के साथ ही वातावरण भावुक और ऊर्जा से परिपूर्ण हो उठा।
कार्यक्रम के अंत में श्रीमती प्रीति शुक्ला, प्रांत सह-संयोजिका ने सभी अतिथियों और मातृशक्ति बहनों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति और दुर्गा वाहिनी समाज के हर वर्ग तक धर्म, संस्कृति और सेवा का संदेश पहुँचाने का कार्य करती रहेगी।
स्थापना दिवस समारोह में बड़ी संख्या में माधुरी नेगी, तारा देवी, सविता नौटियाल, चांद वाला आलोक सिंहा विभाग मंत्री विहिप,आकृति नौटियाल प्रखंड संयोजिका एवं स्थानीय पार्षद सुमन बुटोला, मातृशक्ति दुर्गा वाहिनी कार्यकर्ता और समाज की बहनें शामिल हुईं। मंदिर प्रांगण देर तक जयकारों से गूंजता रहा।
