उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में नशा-विरोधी अभियान शपथ
हर्रावाला। प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी के प्रेरणा से प्रदेश भर में चलाए जा रहे नशा मुक्त देवभूमि अभियान के अंतर्गत विश्वविद्यालय के कुलपति अरुण कुमार त्रिपाठी एवं कुलसचिव नरेंद्र सिंह के मार्गदर्शन मेंआयुर्वेद संकाय, मुख्य परिसर उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में नशा मुक्त उत्तराखंड अभियान के अन्तर्गत दिनांक २५/८/२०२५ को आयुर्वेद छात्र-छात्राओं को नशा-मुक्त अभियान के अंतर्गत प्रेरक उद्बोधन एवं शपथ ग्रहण का कार्यक्रम किया गया। कार्यक्रम में उपपरिसर निदेशक डॉ नंदकिशोर दधीचि, विश्वविद्यालय के नशा मुक्ति अभियान के नोडल अधिकारी डॉक्टर अमित तमदड्डी, परिसर नोडल अधिकारी डॉ राजीव कुरेले, डॉ ऋषि आर्य सहनोडल अधिकारी, डा0डी.पी.पैन्यूली आदि की उपस्थिति में बीएएमएस 2022 बैच के विद्यार्थियों के लिए सकारात्मक कार्यक्रम किया गया। डॉ राजीव कुरेले ने अपने उद्बोधन में नशा के प्रकार, नशे के कारण, नशे के शरीर पर दुष्प्रभाव, तथा नशे के रैकेट और जंजाल से कैसे बचा जाए इसके बारे में विस्तृत जानकारी दी तथा विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित नशा मुक्ति सेल के बारे में बताया तथा डॉ अमितने विद्यार्थियों को मोटिवेट करते हुए कहा कि जब हम सामाजिक रूप से आपस में जोड़ते हैं खेलकूद आदि में अपनी गतिविधि को रखते हैं और पढ़ने पर ध्यान देते हैं , अपनी जीवन शैली आयुर्वेदिक एवं योग में रखते हैं तो निश्चित रूप नशे से बच सकते हैं। कैंपस को 100% नशा मुक्त बनाने के लिए उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया और साथ ही साथियों के बीच एकता और सहयोग को बढ़ावा देने हेतु ।
नशा-विरोधी अभियान शपथ लिया गया जिसमे छात्र -छात्राओं ने अपने साथी छात्रों के साथ, एक उज्जवल भविष्य और नशा-मुक्त जीवन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की शपथ लेने के लिए खड़े हुए ।
जिसमे सब मिलकर अपने सपनों को अपनाएँगे और स्वस्थ विकल्प चुनने में एक-दूसरे का साथ देंगे।
डा राजीव कुरेले ने शपथ निम्नवत्त दिलाई
मैं शपथ लेता/लेती हूँ:
1. नशा-मुक्त रहना: मैं यह स्वीकार करते हुए कि ये मेरे शरीर, मन और भविष्य को नुकसान पहुँचा सकते हैं, नशा या शराब का सेवन न करने का चुनाव करूँगा/करूँगी।
2. अपने साथियों का समर्थन करना: मैं अपने दोस्तों और सहपाठियों के साथ खड़ा रहूँगा/रहूँगी, उन्हें सकारात्मक और स्वस्थ निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित करूँगा/करूँगी और ज़रूरत पड़ने पर मदद की पेशकश करूँगा/करूँगी।
3. सकारात्मकता को अपनाना: मैं ऐसी गतिविधियों में शामिल रहूँगा/रहूँगी जो मुझे और मेरे समुदाय को ऊपर उठाएँ, और खेल, कला में आनंद पाऊँगी/पाऊँगी।
4. अपनी बात कहना: मैं साथियों के दबाव के खिलाफ आवाज़ उठाऊँगा और एक नशा-मुक्त वातावरण की वकालत करूँगा जहाँ हम सब मिलकर फल-फूल सकें।
5. मदद माँगना: मैं समझता/समझती हूँ कि मदद माँगना ठीक है। अगर मुझे कोई परेशानी हो रही है या मैं परेशान महसूस कर रहा/रही हूँ, तो मैं भरोसेमंद वयस्कों, शिक्षकों और दोस्तों से संपर्क करूँगा/करूँगी।
हम सब मिलकर एक मज़बूत और जीवंत समुदाय बना सकते हैं जो नशे के प्रभाव से मुक्त हो।
मैं इस शपथ का पालन करने और ऐसे चुनाव करने के लिए प्रतिबद्ध हूँ जो मेरे और मेरे आस-पास के लोगों के लिए एक स्वस्थ और आशाजनक भविष्य की ओर ले जाएँ।
विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी एवं कार्यक्रम के संयोजक कार्यक्रम में डॉ. राजीव कुरेले एसोसिएट प्रोफेसर – एंटी ड्रग कैंपेन अधिकारी ने बताया कि और भी कार्यक्रम सितंबर एवं अक्टूबर महीने में प्रस्तावित किए गए हैं जिसमें बच्चों के पोस्टर कंपटीशन, व्याख्यान, नुक्कड़ नाटक, कोटेशन, मोटिवेशनल वीडियो कंटेंटक्रिएशन, कैंपेन आदि भी संचालित किए जाएंगे। कार्यक्रम के अंत में डॉ ऋषि आर्य ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
