रुड़की, 23 सितंबर 2026: 11वें विश्व आयुर्वेद दिवस के पावन अवसर पर कोर मेडिकल कॉलेज ऑफ आयुर्वेद एंड हॉस्पिटल, कोर यूनिवर्सिटी में सिटी चैरिटेबल ब्लड सेंटर के सहयोग से रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों तथा अन्य सदस्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए रक्तदान किया। शिविर में 200 यूनिट रक्त संग्रह किया गया।
रक्तदान शिविर का शुभारंभ कोर यूनिवर्सिटी के चेयरमैन श्री जे सी जैन जी, वाइस चांसलर प्रो. डॉ. अनुभा सिंह जी प्रो. वाइस चांसलर प्रो डॉ. राजेश उपाध्याय जी तथा कोर मेडिकल कॉलेज ऑफ आयुर्वेद एंड हॉस्पिटल के प्रिंसिपल प्रो. डॉ. प्रत्यूष कुमार सिंह जी और सिटी चेरिटेबल ब्लड सेंटर के श्री राहुल अरोड़ा जी के द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
इस अवसर पर कोर यूनिवर्सिटी के जनसंपर्क अधिकारी श्री महेश पाल जी ने शिविर के सफल आयोजन में सक्रिय एवं महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस अवसर पर चेयरमैन सर ने विश्व आयुर्वेद दिवस के पावन अवसर पर रक्तदान को मानवता की सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए सभी से नियमित रूप से रक्तदान करने और समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक यूनिट रक्त किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। युवाओं को विशेष रूप से आगे आकर इस पुनीत कार्य में भाग लेना चाहिए।
वाइस चांसलर प्रो. डॉ. अनुभा सिंह जी ने कहा कि विश्व आयुर्वेद दिवस केवल आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार का अवसर ही नहीं, बल्कि “सेवा, स्वास्थ्य और मानव कल्याण” के संकल्प को मजबूत करने का भी अवसर है। रक्तदान शिविर इसी मानवीय भावना का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
प्रो. वाइस चांसलर प्रो डॉ. राजेश उपाध्याय जी तथा कोर मेडिकल कॉलेज ऑफ आयुर्वेद एंड हॉस्पिटल के प्रिंसिपल प्रो. डॉ. प्रत्यूष कुमार सिंह जी ने रक्तदाताओं, सिटी चेरिटेबल ब्लड सेंटर की सदस्य , कोर यूनिवर्सिटी के प्रशासन तथा आयोजन में सहयोग करने वाले सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि रक्तदान जैसे सामाजिक सरोकारों में कोर परिवार की सक्रिय भागीदारी भविष्य में भी निरंतर जारी रहेगी।
शिविर के दौरान रक्तदाताओं को रक्तदान के महत्व के प्रति जागरूक किया गया तथा सुरक्षित रक्तदान से संबंधित आवश्यक जानकारी भी प्रदान की गई। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों एवं युवाओं में “रक्तदान—महादान” की भावना को और मजबूत किया।
