कबाब चीनी: जड़ी-बूटी में छिपा सेहत का खजाना
-डॉ राजीव कुरेले आयुर्वेद विशेषज्ञ
भारतीय चिकित्सा परंपरा में कई ऐसी जड़ी-बूटियाँ हैं, जिनका नाम सुनते ही आम लोग चौंक जाते हैं। आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा में इनका उपयोग सदियों से होता आया है, लेकिन आधुनिक जीवनशैली और बाजारू दवाओं की भीड़ में ये कहीं खो गईं। ऐसी ही एक अनोखी जड़ी-बूटी है कबाब चीनी (Piper cubeba), जिसे क्यूबेब पेपर या टेल्ड पेपर भी कहा जाता है। देखने में यह काली मिर्च जैसी होती है, लेकिन इसके पीछे निकली छोटी-सी डंडी इसे अलग पहचान देती है।
कबाब चीनी का इतिहास और उत्पत्ति
कबाब चीनी का उल्लेख कई पुराने ग्रंथों में मिलता है। यूनानी चिकित्सकों ने इसे दमा और यौन रोगों के लिए अत्यंत उपयोगी औषधि बताया है। आयुर्वेद के भैषज्य रत्नावली और चरक संहिता में भी इसका जिक्र मिलता है। इतिहासकार मानते हैं कि अरब व्यापारी इसे इंडोनेशिया से भारत और फिर यूरोप तक ले गए थे। मध्यकाल में यह मसाला यूरोपीय भोजन में भी इस्तेमाल होता था।
पहचान और स्वरूप
फल गोल और मिर्च जैसा होता है।
आकार 3–6 मिमी का।
रंग गहरा भूरा या काला।
पीछे पतली-सी डंडी जुड़ी रहती है।
स्वाद तीखा, हल्का कड़वा और सुगंधित।
औषधीय गुण: क्यों खास है कबाब चीनी
विशेषज्ञों के अनुसार, कबाब चीनी में कई सक्रिय तत्व पाए जाते हैं – जैसे पिपेरिन, क्यूबेबिन, आवश्यक तेल और रेज़िन। यही तत्व इसे औषधीय गुणों से भरपूर बनाते हैं।
श्वसन रोगों में कारगर
विशेषज्ञों का कहना है कि कबाब चीनी सांस से जुड़ी बीमारियों में बेहद कारगर है। दमा, खाँसी और गले की खराश की स्थिति में यह बलगम को पतला कर बाहर निकालती है। साथ ही फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में मदद करती है।
मूत्र संक्रमण का रामबाण
आयुर्वेदिक चिकित्सकों के मुताबिक कबाब चीनी प्राकृतिक डाययूरेटिक यानी मूत्रवर्धक है। यह पेशाब में जलन, बार-बार संक्रमण और गुर्दे की सूजन में राहत पहुँचाती है।
1. श्वसन तंत्र के लिए वरदान
दमा, खाँसी और गले की खराश में राहत।
बलगम को पतला कर बाहर निकालने की क्षमता।
गले में जमा संक्रमण को दूर करता है।
2. मूत्र रोगों में कारगर
पेशाब में जलन और दर्द में लाभकारी।
गुर्दे की सूजन और बार-बार होने वाले संक्रमण में उपयोगी।
प्राकृतिक मूत्रवर्धक (Diuretic)।
3. पाचन शक्ति का रक्षक
अपच, गैस और पेट दर्द को दूर करता है।
भूख न लगने पर सेवन लाभकारी।
पेट के कीड़े नष्ट करने की क्षमता।
4. यौन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी
यूनानी चिकित्सा पद्धति में कबाब चीनी को प्राकृतिक अफ्रोडिज़ियक यानी यौन शक्ति बढ़ाने वाली औषधि माना गया है। यह कमजोरी, शीघ्रपतन और यौन दुर्बलता में उपयोगी है।
5. संक्रमणरोधी गुण
बैक्टीरिया और फंगस दोनों पर असरदार।
गले, फेफड़ों और मूत्रमार्ग के संक्रमण को रोकने में सहायक।
सेवन की विधियाँ
आयुर्वेदिक चिकित्सकों के अनुसार कबाब चीनी का सेवन विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है –
चूर्ण (पाउडर): 1–3 ग्राम तक शहद या गुनगुने पानी के साथ।
काढ़ा: 5–6 दाने उबालकर, छानकर पीना।
गोली/कैप्सूल: आयुर्वेदिक कंपनियों द्वारा तैयार।
तेल: कुछ उपचारों में इसका तेल भी प्रयुक्त होता है।
विशेषज्ञों की राय
डॉ. डॉ राजीव कुरेले आयुर्वेद विशेषज्ञ बताते हैं—
कबाब चीनी श्वसन और मूत्र रोगों के लिए रामबाण है। यदि इसे सीमित मात्रा में लिया जाए तो यह बिना किसी दुष्प्रभाव के शरीर को मजबूत बनाती है। लेकिन इसकी मात्रा हमेशा चिकित्सक की देखरेख में ही तय करनी चाहिए।
कबाब चीनी का सेवन सीमित मात्रा में किया जाए तो यह दमा से लेकर मूत्र संक्रमण तक में बेहद असरदार है। लेकिन इसका उपयोग हमेशा चिकित्सक की देखरेख में करना चाहिए।
सावधानियाँ
अधिक सेवन से पेट में जलन और सिरदर्द हो सकता है।
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को विशेषज्ञ की सलाह के बिना इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
जिन लोगों को ज्यादा एसिडिटी रहती है, वे इसका सेवन न करें।
आज जब लोग छोटी-सी बीमारी के लिए एंटीबायोटिक का सहारा ले रहे हैं, वहीं कबाब चीनी जैसी प्राकृतिक औषधियाँ बिना किसी बड़े दुष्प्रभाव के शरीर को स्वस्थ रखने में मददगार हो सकती हैं। यह न केवल प्राचीन चिकित्सा का हिस्सा है, बल्कि आधुनिक शोध भी इसके गुणों को स्वीकार कर रहे हैं।
कबाब चीनी सचमुच एक ऐसा खजाना है, जिसे हमारी रसोई और दवा दोनों में जगह मिलनी चाहिए।
लेखक-डॉ राजीव कुरेले आयुर्वेद विशेषज्ञ एसोसिएट प्रोफेसर उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय हररावाला देहरादून उत्तराखंड
