देवभूमि उत्तराखंड को ऐसा विशिष्ट उपहार देने के लिए डॉ. निशंक का हार्दिक आभार” : मुख्यमंत्री धामी
लेखक गाँव ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के साथ ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का वैश्विक गंतव्य बन रहा है: डॉ. निशंक
देहरादून, 29 अक्टूबर। थानों स्थित लेखक गाँव में आयोजित पाँच दिवसीय लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव–2026 का समापन साहित्य, संस्कृति, कला और वैश्विक बंधुत्व के प्रेरक संदेशों के साथ हुआ। समारोह में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री श्री अजय टम्टा, पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रकाश सिंह सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित श्री कैलाश सत्यार्थी ने वीडियो संदेश के माध्यम से शुभकामनाएँ दीं। 60 से अधिक देशों से आए साहित्यकारों, प्रवासी भारतीयों, कलाकारों, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों की सहभागिता ने महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संवाद का विशिष्ट मंच बनाया।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने लेखक गाँव की परिकल्पना और निर्माण के लिए डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि लेखक गाँव केवल एक परिसर नहीं, बल्कि उन विचारों और संकल्पों का प्रतीक है, जो समाज को दिशा देते हैं तथा भावी पीढ़ियों का निर्माण करते हैं। उन्होंने कहा, “अटल जी यदि आज हमारे बीच होते, तो डॉ. निशंक जी द्वारा निर्मित लेखक गाँव को देखकर अत्यंत प्रफुल्लित होते। उन्हें यह देखकर बहुत प्रसन्नता होती कि साहित्य और विचारों की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए ऐसा अभिनव प्रयास किया जा रहा है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी शब्दों के साधक और माँ सरस्वती के उपासक थे। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि शब्द राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बन सकते हैं। लेखक गाँव बच्चों और युवाओं को साहित्य-सृजन के लिए प्रेरित करने तथा उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का महत्त्वपूर्ण कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह परिसर केवल भवनों का समूह नहीं, बल्कि विचार-साधना का केंद्र है, जो नई पीढ़ी को दिशा देता है। मुख्यमंत्री ने डॉ. निशंक और उनकी पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा, “देवभूमि उत्तराखंड को ऐसा विशिष्ट उपहार देने के लिए डॉ. निशंक जी का हार्दिक आभार।” उन्होंने देश-विदेश से आए साहित्यकारों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों और विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि महोत्सव का समापन किसी आयोजन का अंत नहीं, बल्कि सृजन की एक नई यात्रा का आरंभ है।
नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित श्री कैलाश सत्यार्थी ने वीडियो संदेश में महोत्सव की सफलता पर डॉ. निशंक और उनकी टीम को बधाई दी। उन्होंने उत्तराखंड में लेखक गाँव की स्थापना और उसके विकास के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह वह पावन भूमि है, जहाँ हजारों वर्षों से ऋषियों, मुनियों और साधकों ने मानवता को ज्ञान, दर्शन और अध्यात्म की अमूल्य विरासत प्रदान की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साहित्यकारों का दायित्व और अधिक बढ़ गया है। साहित्य को केवल समाज का दर्पण नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को जागृत करने और सामाजिक विसंगतियों को दूर करने का माध्यम भी बनना चाहिए। उन्होंने आह्वान किया कि भारत की धरती से करुणा और संवेदना का वैश्वीकरण हो तथा साहित्य के माध्यम से विश्व में शांति, सहानुभूति और मानवीय एकता का विस्तार किया जाए।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी, सभी अतिथियों, साहित्यकारों, कलाकारों, शिक्षाविदों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड शिक्षा, संस्कृति, अध्यात्म और विकास के विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर आगे बढ़ रहा है। डॉ. निशंक ने कहा कि लेखक गाँव भारतीय ज्ञान परंपरा, साहित्यिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सार्थक प्रयास है। यहाँ विभिन्न देशों और भारतीय राज्यों से आए रचनाकार एक-दूसरे की भाषाओं, विचारों और परंपराओं से परिचित हो रहे हैं।
डॉ. निशंक ने कहा, “लेखक गाँव ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार करने के साथ-साथ ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का वैश्विक गंतव्य भी बन रहा है।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी प्राचीन ज्ञान-संपदा और सांस्कृतिक चेतना के आधार पर विश्व में नई पहचान स्थापित कर रहा है। लेखक गाँव भारतीय साहित्य, दर्शन, अध्यात्म और लोक परंपराओं को विश्व समुदाय तक पहुँचाने का माध्यम बन रहा है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 का उल्लेख करते हुए डॉ. निशंक ने कहा कि भारतीय भाषाओं, मातृभाषा में शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा पर केंद्रित यह नीति शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा प्रदान करती है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन से विद्यार्थियों में मौलिक चिंतन, अनुसंधान, नवाचार और रचनात्मकता को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के साथ भारतीय ज्ञान और जीवन-मूल्यों का समन्वय भारत को वैश्विक ज्ञान नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाएगा।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री श्री अजय टम्टा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद देश में विकास और आधारभूत संरचना को नई गति मिली है। उत्तराखंड में भी विकास और रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य की युवा शक्ति और मातृशक्ति प्रदेश की प्रगति में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। श्री टम्टा ने लेखक गाँव को साहित्य, संस्कृति और कला का संगम बताते हुए कहा कि 60 से अधिक देशों के प्रतिभागियों की सहभागिता इसकी वैश्विक महत्ता को दर्शाती है। उन्होंने डॉ. निशंक और आयोजन से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी।
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रकाश सिंह ने कहा कि लेखक गाँव में मिलने वाली शांति, आत्मीयता और अपनत्व का अनुभव विशिष्ट है। यहाँ आने वाले प्रतिभागी देवभूमि की संस्कृति और परंपराओं को अपने साथ लेकर लौटेंगे। उन्होंने कहा कि लेखक गाँव युवाओं और विद्यार्थियों को साहित्य, संस्कृति तथा भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने का महत्त्वपूर्ण मंच है। उन्होंने डॉ. निशंक के प्रयासों की सराहना करते हुए आयोजन की सफलता पर बधाई दी।
लेखक गाँव की निदेशक विदुषी निशंक ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और सहयोगियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महोत्सव का उद्देश्य साहित्य, संस्कृति और कला के माध्यम से विभिन्न देशों तथा भारतीय भाषाओं के बीच सार्थक संवाद स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि देश-विदेश से आए साहित्यकारों, विचारकों, कलाकारों और विद्यार्थियों की सहभागिता ने इस आयोजन को विचारों के आदान-प्रदान का जीवंत मंच बनाया है। यह महोत्सव युवाओं को नई दिशा देने, उनकी रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करने और विश्वबंधुत्व की भावना को सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
महोत्सव में 60 से अधिक देशों के साहित्यकारों, प्रवासी भारतीयों और विदेशी प्रतिनिधियों के साथ देश के विभिन्न राज्यों से आए साहित्यकारों, विचारकों, कलाकारों, शिक्षाविदों तथा विद्यार्थियों ने सहभागिता की। विभिन्न सत्रों में साहित्य, हिंदी एवं भारतीय भाषाओं, भारतीय ज्ञान परंपरा, शिक्षा, कला, प्रकृति और अध्यात्म सहित समकालीन वैश्विक विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। इस आयोजन ने रचनाकारों को संवाद, अनुभव साझा करने और नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने का अवसर प्रदान किया।
लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव–2026 का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि साहित्य और संस्कृति के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक मंच तक पहुँचाने, युवाओं में सृजनशीलता विकसित करने तथा करुणा, मानवीय मूल्यों और विश्वबंधुत्व की भावना को सुदृढ़ करने का यह प्रयास निरंतर आगे बढ़ता रहेगा।
