क्रांतिकारी शालू सैनी ने सड़क पर पड़े बुजुर्ग मृतक की बेटी बनकर दी मुखाग्नि, छः हजार से अधिक लावारिस मृतकों की वारिस बन अंतिम विदाई देने वाली क्रांतिकारी शालू सैनी ने फिर निभाया बेटी का धर्म

क्रांतिकारी शालू सैनी ने सड़क पर पड़े बुजुर्ग मृतक की बेटी बनकर दी मुखाग्नि, छः हजार से अधिक लावारिस मृतकों की वारिस बन अंतिम विदाई देने वाली क्रांतिकारी शालू सैनी ने फिर निभाया बेटी का धर्म
रुड़की।मुजफ्फरनगर की जानी-मानी बेटी लावारिसों की वारिस क्रांतिकारी शालू सैनी ने अब तक लगभग छः हजार से अधिक लावारिस व बेसहारा मृतकों को सम्माननीय अंतिम विदाई दे एक बार फिर मानवता की मिसाल पेश की है।साईं बाबा मंदिर के सामने स्टेशन पर ,स्थित अपने क्रान्तिकारी फास्ट फूड स्टॉल के पास मिले एक लावारिस बुजुर्ग का,जिनका कोई परिजन मौजूद नहीं था,क्रांतिकारी शालू सैनी ने स्वयं उनकी बेटी बनकर पूरे विधि-विधान और सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया।क्रांतिकारी शालू सैनी ने बताया कि बाबूजी पिछले कितने दिनों से मेरे ठेले के पास ही सोते थे और मांगकर खाते थे।जब उनका देहांत हुआ तो उनका अपना कोई नहीं था,ऐसे ही बेसहाराओं की बेटी,बहन और वारिस बनकर ये मेरे लिए कोई काम नहीं,मेरा धर्म है।मेरा कर्म है मेरी जिम्मेदारी है और हर बेसहारा मेरे परिवार का हिस्सा है।महाकाल की कृपा से मैं उनकी अंतिम यात्रा सम्मान के साथ करती रहूँगी।उल्लेखनीय है कि क्रांतिकारी शालू सैनी पिछले कई वर्षों से लावारिस शवों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार कर रही हैं,जो पूरे उत्तर प्रदेश में मानवता और नारी शक्ति की एक अद्वितीय मिसाल है।पुलिस प्रशासन और स्थानीय लोगों ने उनके इस पुनीत कार्य की सराहना की है।

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