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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा संचालित “जन–जन की सरकार, जन–जन के द्वार” कार्यक्रम आज राज्य में सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और प्रभावी जनसेवा का मजबूत उदाहरण बनकर उभर रहा है। इस कार्यक्रम के माध्यम से सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शासन केवल सचिवालयों और दफ्तरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सीधे जनता के द्वार तक पहुंचेगा। 12 जनवरी 2026 की दैनिक प्रगति रिपोर्ट इस बात का ठोस प्रमाण है कि सरकार जनसमस्याओं के समाधान को लेकर पूरी प्रतिबद्धता और गंभीरता के साथ धरातल पर कार्य कर रही है।

प्रदेश के सभी 13 जनपदों में अब तक 312 से अधिक जनसेवा कैम्पों का आयोजन किया जाना यह दर्शाता है कि सरकार ने पूरे राज्य को एक समान दृष्टि से देखने की नीति अपनाई है। इन कैम्पों के माध्यम से 2 लाख 36 हजार से अधिक नागरिकों का पंजीकरण किया गया, जो यह बताता है कि आम जनता इस पहल पर भरोसा कर रही है और सरकार से सीधे जुड़ रही है। यह केवल आंकड़ों की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह जनता और शासन के बीच मजबूत होते विश्वास का प्रतीक है।

इन कैम्पों के दौरान 25,877 जनशिकायतें प्राप्त होना इस बात को दर्शाता है कि लोगों ने अपनी समस्याओं को खुलकर सरकार के सामने रखा। इनमें से 17,605 शिकायतों का त्वरित और प्रभावी निस्तारण प्रशासन की संवेदनशीलता, जवाबदेही और कार्यकुशलता को स्पष्ट रूप से सामने लाता है। यह वही प्रशासनिक दृष्टिकोण है, जिसकी अपेक्षा आम नागरिक वर्षों से करता रहा है—जहां उसकी समस्या सुनी भी जाए और समय पर उसका समाधान भी हो।

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि सरकारी सेवाओं को लोगों के लिए सरल, सुलभ और पारदर्शी बनाया गया है। विभिन्न विभागों द्वारा अब तक 35,560 से अधिक प्रमाण पत्र निर्गत किए जा चुके हैं। यह उन नागरिकों के लिए बड़ी राहत है, जिन्हें पहले इन दस्तावेजों के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। इसके साथ ही 1,31,212 से अधिक नागरिकों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित किया जाना इस बात का संकेत है कि सरकार की योजनाएं अब फाइलों से निकलकर सीधे जनता के जीवन में बदलाव ला रही हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल नई योजनाओं की घोषणा करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर योजना का वास्तविक लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। उनका मानना है कि “जन–जन की सरकार, जन–जन के द्वार” कार्यक्रम उत्तराखंड में सुशासन का एक सशक्त और व्यवहारिक मॉडल बन चुका है, जहां पारदर्शिता, समयबद्ध कार्रवाई और जनसमस्याओं का समाधान सर्वोच्च प्राथमिकता है।

धामी सरकार की कार्यशैली में यह साफ झलकता है कि प्रशासन को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाया जा रहा है। यही कारण है कि यह कार्यक्रम केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि जनता के साथ सीधा संवाद और विश्वास का सेतु बनता जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक, लोगों को एक ही मंच पर अपनी समस्याएं रखने और समाधान पाने का अवसर मिल रहा है।

राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में इस कार्यक्रम को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा, ताकि कोई भी नागरिक शासन की पहुंच से बाहर न रहे। सरकार का संकल्प है कि उत्तराखंड में शासन व्यवस्था ऐसी हो, जहां आम आदमी को अपने अधिकारों और सुविधाओं के लिए भटकना न पड़े, बल्कि सरकार स्वयं उसके द्वार तक पहुंचे।

कुल मिलाकर, “जन–जन की सरकार, जन–जन के द्वार” कार्यक्रम मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उस उत्तराखंड की तस्वीर पेश कर रहा है, जहां शासन सेवा का माध्यम है, सत्ता का नहीं; जहां संवेदनशीलता, पारदर्शिता और त्वरित समाधान सुशासन की पहचान बन चुके हैं। यह कार्यक्रम न केवल वर्तमान में जनसेवा को नई दिशा दे रहा है, बल्कि भविष्य के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद प्रशासनिक मॉडल भी तैयार कर रहा है।

By admin