10वें देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में “जिगर का टुकड़ा” का भावनात्मक प्रदर्शन
अंगदान महादान के संदेश ने दर्शकों को किया प्रेरित
देहरादून। सेंट्रो मॉल में आयोजित 10वें देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में शनिवार को निर्देशक श्री रामानंद भट्ट और निर्माता शोभा भट्ट की शॉर्ट फिल्म “जिगर का टुकड़ा” का विशेष प्रदर्शन किया गया। फिल्म ने न सिर्फ दर्शकों की आंखें नम कीं, बल्कि अंगदान जैसे संवेदनशील विषय पर गहरी सोच भी जगाई।
“अंगदान महादान” की अवधारणा पर आधारित यह फिल्म पिथौरागढ़ निवासी डा. अशोक पंत की वास्तविक जीवन-गाथा को केन्द्र में रखती है। गंभीर लीवर बीमारी से जूझ रहे डा. पंत के उपचार के लिए लगभग 35 लाख रुपये और उपयुक्त लीवर डोनर की आवश्यकता थी। इलाज की इस चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में उनके बेटे शिवाशीष पंत ने आगे बढ़कर अपने पिता को लीवर दान किया और उनके जीवन को नया संबल दिया।
फिल्म में इस पूरे संघर्ष को बेहद भावनात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया गया है—एक परिवार की पीड़ा, पिता के जीवन को बचाने की दृढ़ इच्छा, बेटे का अदम्य साहस, और चिकित्सकों की दिन–रात की मेहनत, सब कुछ दर्शकों को भीतर तक छू जाता है। फिल्म यह संदेश देती है कि अंगदान केवल किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज का जीवन बदल सकता है।
निर्देशक रामानंद भट्ट ने कहा कि फिल्म का उद्देश्य केवल कहानी कहना नहीं, बल्कि समाज में अंगदान को लेकर जागरूकता फैलाना है। निर्माता शोभा भट्ट ने बताया कि उन्हें उम्मीद है कि यह प्रयास लोगों को अंगदान के महत्त्व को समझने के लिए प्रेरित करेगा।
दर्शकों ने फिल्म की सराहना करते हुए कहा कि “जिगर का टुकड़ा” जैसे प्रयास न सिर्फ सिनेमा की जिम्मेदारी को दर्शाते हैं, बल्कि सामाजिक चेतना के नए आयाम भी खोलते हैं। फिल्म फेस्टिवल के आयोजकों ने भी इस पहल की सराहना की और कहा कि ऐसे विषयों को बड़े मंच पर लाना अत्यंत आवश्यक है।
समापन के दौरान उपस्थित फिल्म प्रेमियों ने अंगदान के प्रति जागरूकता अभियान को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।
“जिगर का टुकड़ा” अपनी संवेदनशील प्रस्तुति और सामाजिक संदेश के कारण फेस्टिवल की चर्चित फिल्मों में शामिल हो गई।
