हर्रावाला। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, मुख्य परिसर हर्रावाला के शल्य तंत्र विभाग द्वारा ‘अग्निकर्म एवं विद्धकर्म’ विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता डॉ. महेश संगवी (मुंबई) रहे, जो प्रोक्टोलॉजी, अग्निकर्म एवं विद्धकर्म के क्षेत्र के प्रसिद्ध विशेषज्ञ हैं। उनके साथ उनके गुरु एवं सी.आर.आई. मुंबई के पूर्व निदेशक डॉ. कमलेश कुमार चौपड़ा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) पंकज शर्मा, डीन एवं परिसर निदेशक ने की। इस अवसर पर उप-परिसर निदेशक डॉ. नंद किशोर दधीचि, शल्य विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील पांडेय, डॉ. अमित तमाड्डडी, शैक्षणिक अधीक्षक डॉ. राजीव कुरेले, डॉ. अर्चना सिंह, डॉ. वर्षा सक्सेना, डॉ. ऊषा राणा, वैद्य अनुमेहा जोशी एवं वैद्य विनीश गुप्ता जोशी सहित विभाग के समस्त शिक्षकगण एवं 100 से अधिक इंटर्न डॉक्टर एवं बीएएमएस छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं अध्यक्ष प्रो. पंकज शर्मा द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इसके उपरांत डॉ. महेश संगवी ने अग्निकर्म एवं विद्धकर्म का प्रयोगात्मक डेमोंस्ट्रेशन प्रस्तुत किया तथा इसके सैद्धांतिक एवं वैज्ञानिक पहलुओं पर विस्तारपूर्वक व्याख्यान दिया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. पंकज शर्मा ने कहा कि अग्निकर्म भारतीय शल्य चिकित्सा की एक अद्वितीय चिकित्सा पद्धति है, जो आज भी समान रूप से प्रभावी है। उन्होंने संधि पीड़ा, फ्रोजन शोल्डर एवं न्यूरोमस्कुलर डिजीज में अग्निकर्म की उपयोगिता एवं इसके वैज्ञानिक आधारों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से संवाद कर अपने प्रश्न पूछे। कार्यशाला का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
