दिल्ली-प्रधानमंत्री ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए दस सूत्री एजेंडा प्रस्तुत किया है, जिसमें एजेंडा संख्या 3 में महिला नेतृत्व और उनकी अधिक भागीदारी पर जोर दिया गया है। यह एजेंडा यह दर्शाता है कि आपदा जोखिम प्रबंधन में महिलाओं को केन्द्र में रखा जाना चाहिए।

महिलाओं को नेतृत्वकारी भूमिका प्रदान करने के लिए प्रमुख पहलों का विवरण:

  1. संशोधित राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (एनडीएमपी), 2019:
    इस योजना में महिला सशक्तिकरण और आपदा जोखिम प्रबंधन में उनकी नेतृत्वकारी भूमिका को प्रमुखता दी गई है।
  2. आपदा मित्र योजना:
    इस योजना के तहत “आपदा सखी” के रूप में महिलाओं को प्रशिक्षण देकर आपदा प्रतिक्रिया में उनकी भागीदारी को बढ़ावा दिया गया है। लगभग एक लाख प्रशिक्षित आपदा मित्र स्वयंसेवकों में से 20% महिलाएं हैं।
  3. चक्रवात आश्रय प्रबंधन और रखरखाव समितियों (सीएसएमएमसी):
    इन समितियों में महिलाओं की 50% भागीदारी सुनिश्चित की गई है, ताकि आपदा प्रबंधन कार्यों में महिलाओं की सक्रिय भूमिका हो।
  4. टास्क फोर्स समूहों में महिलाओं की प्रमुख भूमिकाएं:
    आपदा तैयारी, बचाव कार्य, प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल आदि से संबंधित विभिन्न टास्क फोर्स समूहों में महिलाओं को नेतृत्व की जिम्मेदारियां दी जाती हैं।
  5. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम):
    एनआईडीएम ने “आपदा जोखिम प्रबंधन में महिलाओं की भूमिका” पर सर्वोत्तम प्रथाओं का संग्रह तैयार किया है और महिलाओं की भूमिका को उजागर करने वाले विशिष्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं।
  6. महिला टुकड़ियों का प्रशिक्षण:
    केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की महिला टुकड़ियों को आपदा प्रबंधन में प्रशिक्षित किया गया है और उन्हें राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) में तैनात किया गया है।
  7. तुर्की में महिला बचावकर्मियों की भूमिका:
    भूकंप के बाद मानवीय सहायता और आपदा राहत प्रदान करने के लिए तुर्की में तैनात एनडीआरएफ टीम में महिला बचावकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यह जानकारी गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

इन पहलों से स्पष्ट है कि सरकार आपदा जोखिम न्यूनीकरण में महिलाओं को सक्रिय रूप से शामिल कर रही है और उन्हें नेतृत्वकारी भूमिकाएं प्रदान कर रही है। इस प्रकार, महिलाओं की भूमिका को प्रमुखता देते हुए आपदा प्रबंधन को और प्रभावी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

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