PIB देहरादून के सहायक निदेशक संजीव सुंद्रियाल के नेतृत्व में पांच दिवसीय अध्ययन दौरा; INCOIS में सुनामी चेतावनी से लेकर NIN में संतुलित आहार और विटामिन-डी पर शोध तक की जानकारी
हैदराबाद से गिरीश जोशी की रिपोर्ट
हैदराबाद। समुद्र की गहराइयों से उठने वाली लहरों की समय रहते चेतावनी हो या देश के हर परिवार की थाली में पोषण का संतुलन—विज्ञान और जनहित की इन दोनों तस्वीरों को करीब से समझने का अवसर उत्तराखंड के मीडिया प्रतिनिधिमंडल को हैदराबाद में मिल रहा है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) देहरादून के सहायक निदेशक संजीव सुंद्रियाल के नेतृत्व में पहुंचा 15 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल पांच दिवसीय अध्ययन एवं मीडिया एक्सपोजर टूर पर है। यह दौरा 31 अगस्त से 4 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है।

PIB देहरादून की ओर से आयोजित इस दौरे का उद्देश्य पत्रकारों को केंद्रीय सरकार के महत्वपूर्ण विकास कार्यों, वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी प्रगति और जनहित की पहलों को जमीनी स्तर पर देखने और विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने का अवसर देना है। सहायक निदेशक संजीव सुंद्रियाल के अनुसार, ऐसे प्रेस टूर क्षेत्रीय मीडिया और राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के बीच महत्वपूर्ण सेतु का काम करते हैं। पत्रकारों को योजनाओं और संस्थानों की वास्तविक कार्यप्रणाली समझने के बाद तथ्यपरक एवं प्रमाणिक जानकारी अपने पाठकों तक पहुंचाने का अवसर मिलता है।

पहले समझा मीडिया और सरकारी संचार का तंत्र
हैदराबाद पहुंचने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने PIB हैदराबाद का दौरा किया। यहां PIB हैदराबाद की एडीजी श्रुति पाटिल और संयुक्त निदेशक डॉ. मानस कृष्णकांत सहित अधिकारियों से संवाद हुआ। प्रतिनिधिमंडल को तेलंगाना में बदलते मीडिया परिदृश्य तथा PIB और केंद्रीय संचार ब्यूरो (CBC) की सरकारी नीतियों, कार्यक्रमों और प्रमुख पहलों को जनता तक पहुंचाने की व्यवस्था के बारे में जानकारी दी गई।
समुद्र की लहरों से पहले चेतावनी का विज्ञान
दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) भी पहुंचा। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन इस संस्थान में पत्रकारों को भारत की समुद्री सूचना सेवाओं, समुद्र की निगरानी, पूर्वानुमान और सुनामी प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के बारे में जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि समुद्र से मिलने वाली सूचनाओं का वैज्ञानिक विश्लेषण कर संभावित आपदाओं के संबंध में समय रहते चेतावनी और अलर्ट प्रसारित करना किस प्रकार जनजीवन की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यानी जिस तकनीक और वैज्ञानिक तंत्र की जानकारी आम लोगों तक अक्सर किसी आपदा के समय पहुंचती है, उसे पत्रकारों ने इस दौरे में उसके मूल स्रोत और विशेषज्ञों से समझा।


अब बात घर की थाली और देश की सेहत की
इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने ICMR के राष्ट्रीय पोषण संस्थान (NIN), हैदराबाद का भ्रमण किया। यहां वैज्ञानिकों ने पोषण, खाद्य गुणवत्ता, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली पर किए जा रहे शोध की जानकारी दी।
वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि स्वस्थ रहने के लिए सिर्फ पेट भरना पर्याप्त नहीं है। भोजन में अनाज, दालें, सब्जियां, फल, दूध-दही, मेवे-बीज और उचित मात्रा में तेल-वसा का संतुलन जरूरी है। देश में एक ओर कुपोषण चुनौती बना हुआ है तो दूसरी ओर बदलती जीवनशैली के कारण अधिक वजन और मोटापा भी तेजी से उभरती स्वास्थ्य चुनौती बन रहे हैं।
NIN की ओर से बताए गए आहार संबंधी दिशा-निर्देशों में विभिन्न खाद्य समूहों को भोजन में शामिल करने पर जोर दिया गया है। सामान्य आहार मार्गदर्शन के संदर्भ में करीब 400 ग्राम सब्जियां, 100 ग्राम फल, 250 ग्राम अनाज/पोषक अनाज, 300 मिलीलीटर दूध या दही तथा 35 ग्राम मेवे-बीज जैसी मात्राओं का उल्लेख किया गया। तेल एवं वसा की मात्रा सीमित रखने की सलाह भी दी गई।
बच्चों से बुजुर्गों तक पोषण का अलग गणित
वैज्ञानिकों ने बताया कि हर आयु वर्ग की पोषण संबंधी जरूरतें अलग होती हैं। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए अतिरिक्त पोषण, शिशुओं के लिए जन्म के बाद पहले छह महीने तक केवल स्तनपान और छह महीने के बाद उपयुक्त पूरक आहार पर जोर दिया गया।
बच्चों और किशोरों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए पर्याप्त ऊर्जा, प्रोटीन, विटामिन और खनिजों को जरूरी बताया गया। वहीं बुजुर्गों के लिए कम मात्रा में लेकिन अधिक पोषक भोजन को उपयोगी माना गया।
प्रोटीन के नाम पर सप्लीमेंट नहीं
NIN के दिशा-निर्देशों में दाल, फलियां, दूध-दही, अंडा, मछली, मांस, मेवे आदि प्राकृतिक खाद्य स्रोतों से प्रोटीन प्राप्त करने पर जोर दिया गया। मांसपेशियां बढ़ाने के लिए बिना आवश्यकता प्रोटीन सप्लीमेंट लेने से बचने की सलाह भी दी गई।
इसके साथ नमक सीमित करने, अधिक चीनी-वसा वाले और अति-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों को कम करने, पर्याप्त पानी पीने, नियमित शारीरिक गतिविधि करने तथा पैकेट वाले खाद्य पदार्थ खरीदते समय उनके लेबल को पढ़ने पर जोर दिया गया।
विटामिन डी पर सामने आया अहम शोध
NIN से जुड़ी एक अन्य महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खबर भी इस दौरे के दौरान चर्चा में रही। ICMR-NIN के शोधकर्ताओं के अध्ययन में नर चूहों पर विटामिन डी-2 और डी-3 की तुलना की गई। अध्ययन में डी-3 ने मांसपेशियों के द्रव्यमान, मांसपेशी फाइबर के आकार और पकड़ की ताकत से जुड़े संकेतकों में डी-2 की तुलना में बेहतर परिणाम दिखाए। हृदय की कार्यक्षमता और ऊर्जा चयापचय से जुड़े कुछ संकेतकों में भी डी-3 का प्रभाव अधिक पाया गया, विशेषकर विटामिन डी की कमी से उबरने के दौरान।
शोधकर्ताओं ने हालांकि स्पष्ट किया कि यह पशु-अध्ययन है और इसके निष्कर्षों को सीधे मनुष्यों पर लागू करने से पहले आगे शोध की जरूरत है।
पोषण जागरूकता भी दौरे का अहम हिस्सा
हैदराबाद में इसी अवधि में केंद्रीय संचार ब्यूरो (CBC) की ओर से POSHAN MAAH 2026 के तहत पांच दिवसीय Integrated Communication and Outreach Programme भी आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्घाटन राज्यसभा सदस्य डॉ. के. लक्ष्मण ने किया। कार्यक्रम में करीब 40 पोषण सूचना पैनल, विशेषज्ञों के व्याख्यान, IEC स्टॉल और प्रदर्शनियां शामिल हैं। पारंपरिक लोक कलाओं के माध्यम से भी पोषण का संदेश पहुंचाया जा रहा है।
डॉ. लक्ष्मण ने स्वस्थ बच्चे को स्वस्थ राष्ट्र की नींव बताते हुए युवाओं से पोषण जागरूकता अभियान से जुड़ने, खेल और शारीरिक गतिविधियों को जीवनशैली का हिस्सा बनाने तथा मिलेट्स और पारंपरिक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
विकास से विरासत तक हैदराबाद को जानने का अवसर
मीडिया प्रतिनिधिमंडल के कार्यक्रम में वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों के साथ तेलंगाना के हथकरघा और हस्तशिल्प की प्रदर्शनी, शिल्पारामम, सालार जंग संग्रहालय, चारमीनार और लाड बाजार जैसे सांस्कृतिक स्थलों का दौरा भी शामिल है। साथ ही ESIC अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं और कर्मचारी राज्य बीमा व्यवस्था को समझने का कार्यक्रम है।
सहायक निदेशक संजीव सुंद्रियाल की भूमिका बनी महत्वपूर्ण कड़ी
पूरे अध्ययन दौरे में PIB देहरादून के सहायक निदेशक संजीव सुंद्रियाल की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। वे इस प्रेस टूर के Conducting Officer हैं और उनके नेतृत्व में उत्तराखंड के पत्रकार केंद्रीय संस्थानों के कामकाज को सीधे समझ रहे हैं। उनका जोर इस बात पर है कि पत्रकार केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी लेकर न लौटें, बल्कि उनकी वास्तविक कार्यप्रणाली, वैज्ञानिक आधार और जमीन पर प्रभाव को समझकर प्रमाणिक जानकारी जनता तक पहुंचाएं।
हैदराबाद का यह प्रेस टूर महज संस्थानों के भ्रमण तक सीमित नहीं है। समुद्री आपदा से बचाव की चेतावनी प्रणाली से लेकर पोषण विज्ञान, सार्वजनिक स्वास्थ्य, सरकारी संचार, तकनीकी प्रगति और सांस्कृतिक विरासत तक—यह दौरा पत्रकारों को विकास की अलग-अलग कड़ियों को एक साथ देखने और समझने का अवसर दे रहा है। यही जानकारी आगे उत्तराखंड के पाठकों तक पहुंचेगी और राष्ट्रीय स्तर पर हो रहे बदलावों को स्थानीय समाज से जोड़ने का माध्यम बनेगी।
