एक मृतक के परिजन विदेश में, दूसरा लावारिस; शालू सैनी ने निभाई मानवता की जिम्मेदारी
रुड़की, 7 जुलाई।“ना कोई साथ लाता है, ना कोई साथ ले जाता है” — इस वाक्य को सच्चाई में बदलने का बीड़ा उठाया है साक्षी वेल्फेयर ट्रस्ट की राष्ट्रीय अध्यक्ष और वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर क्रांतिकारी शालू सैनी ने। बीते दिन शहर कोतवाली थाना क्षेत्र से मिली दो अलग-अलग सूचनाओं पर उन्होंने लावारिस घोषित दो शवों का पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार कर मानवता की मिसाल पेश की।
एक की संतान विदेश में, दूसरा था बेसहारा
पहला मामला उस मृतक का था जिसकी संतानें विदेश में रह रही थीं और अंतिम संस्कार के लिए भारत आना संभव नहीं था। वहीं दूसरा मृतक पूरी तरह से लावारिस था। ऐसे में क्रांतिकारी शालू सैनी ने दोनों की विधिवत वारिस बनकर, धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार करवाया।
शालू सैनी ने कहा—
“अगर मन में सेवा की भावना हो और हौसला मजबूत हो, तो कुछ भी असंभव नहीं। हर मृतक को कफन और सम्मान मिले, यही मेरा उद्देश्य है।”
वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम
लावारिसों का निःशुल्क अंतिम संस्कार करने वाली शालू सैनी को इस कार्य के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान प्राप्त हो चुका है। उन्होंने बताया कि अब तक वे सैकड़ों बेसहारा, अज्ञात और असहाय शवों को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दे चुकी हैं। उनके इस सेवा कार्य को न केवल स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है।
संसाधनों की कमी, फिर भी सेवा नहीं रुकी
शालू सैनी ने बताया कि संसाधनों की भारी कमी के बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। वह बताती हैं कि कई बार आर्थिक स्थिति इतनी कठिन हो जाती है कि अंतिम संस्कार की व्यवस्था भी मुश्किल हो जाती है, फिर भी वह पीछे नहीं हटतीं।
उन्होंने समाज से अपील करते हुए कहा—
“सामाजिक कार्य अकेले नहीं किए जा सकते। जो लोग इस सेवा में इच्छानुसार योगदान देना चाहें, वे संस्था के नंबर 8273189764 पर Google Pay के माध्यम से सहयोग कर सकते हैं।”
“जिसका कोई नहीं, उसके लिए हम हैं”
शालू सैनी कहती हैं कि —
“अगर कोई व्यक्ति अपनी कमाई का छोटा हिस्सा भी पुण्य कार्यों में लगाता है, तो उसे उसका फल अवश्य प्राप्त होता है। जब इस दुनिया से कोई व्यक्ति चला जाता है और उसका कोई नहीं होता, तब उसकी अंतिम विदाई में हमारे जैसे लोग ही उसका परिवार बनते हैं।”
मानवता का संदेश, सहयोग की अपील
उन्होंने समाज के हर वर्ग से यह आह्वान किया कि जो व्यक्ति किसी लावारिस या असहाय शव के अंतिम संस्कार में सहभागी बनता है, वह वास्तव में मानवता का सच्चा सेवक होता है। शालू सैनी का मानना है कि यह कार्य केवल एक ट्रस्ट का नहीं, पूरे समाज का है।
क्या है साक्षी वेल्फेयर ट्रस्ट?
साक्षी वेल्फेयर ट्रस्ट एक स्वयंसेवी संस्था है जो विशेष रूप से लावारिस, बेसहारा और असहाय शवों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार, महिला सुरक्षा, नशामुक्ति, और बाल कल्याण जैसे कार्यों में संलग्न है। संस्था की स्थापना क्रांतिकारी शालू सैनी ने की थी।
एक प्रेरणा, एक उदाहरण
क्रांतिकारी शालू सैनी का कार्य यह साबित करता है कि जहां न कोई रिश्ता बचा हो, वहां भी करुणा और सेवा की डोरी इंसान को जोड़ सकती है। आज वह उन हजारों बेसहारों की वारिस बन चुकी हैं जिनका इस दुनिया में कोई नहीं था।
