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चार महिला उद्यमियों को मिली ₹1 लाख की सीड फंडिंग, बदलेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था का चेहरा

विशेष संवाददाता

देहरादून, जुलाई 2025।ग्रामीण भारत की महिलाओं में छिपी उद्यमशीलता और आत्मनिर्भरता की भावना को मंच देकर उन्हें नए पंख देने का काम किया है तेजस्विनी चैरिटेबल ट्रस्ट ने। हाल ही में राजधानी देहरादून में आयोजित ‘ग्रामीण हीरो पिचिंग प्रतियोगिता’ में ट्रस्ट से जुड़ी चार प्रेरणादायक महिला उद्यमियों ने अपने विचारों, साहस और व्यावसायिक योजनाओं से निर्णायकों को इतना प्रभावित किया कि उन्हें प्रति व्यक्ति ₹1 लाख की सीड फंडिंग प्रदान की गई।

इस प्रतियोगिता का आयोजन उत्तराखंड की अग्रणी मार्केटिंग एवं कंसल्टिंग संस्था DivIn Pro द्वारा किया गया। प्रदेशभर से चयनित प्रतिभागियों में तेजस्विनी ट्रस्ट की चार महिलाओं ने न केवल अपनी सोच और आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया, बल्कि ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल भी पेश की।

ये हैं वो चार ग्रामीण ‘हीरो’, जिन्होंने रचा इतिहास

  1. आदिति शर्मा
    एक ट्रांसजेंडर महिला जो अपने फूड ट्रक व्यवसाय के जरिए न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं, बल्कि सामाजिक समावेशिता का भी संदेश दे रही हैं।

  2. पुष्पा रानी सिंह
    “रस परणा ग्रीन” नामक घरेलू मसालों के ब्रांड की संस्थापक हैं। उन्होंने पहाड़ी स्वाद और ग्रामीण परंपरा को शुद्धता के साथ बाज़ार तक पहुँचाने का बीड़ा उठाया है। उनके उत्पाद स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार का माध्यम भी बन रहे हैं।

  3. फरज़ाना ख़ान
    जोगी क्लस्टर हेड के रूप में कई स्वयं सहायता समूहों का संचालन कर रही फरज़ाना mushroom उत्पादन इकाई “धरा” चला रही हैं। उन्होंने महिला समूहों को कृषि आधारित व्यवसाय से जोड़कर आत्मनिर्भरता का रास्ता दिखाया है।

  4. जेसल सिंह
    “Dakshini” के नाम से दक्षिण भारतीय व्यंजनों का व्यवसाय कर रही हैं। उनका उद्देश्य उत्तराखंड में दक्षिण भारत के प्रामाणिक स्वाद को पहुँचाना है। वह घर-घर तक इडली, डोसा और सांभर जैसे व्यंजन पहुँचा रही हैं।

महिलाओं की जीत, पूरे समाज की प्रेरणा

इस अवसर पर तेजस्विनी चैरिटेबल ट्रस्ट की संस्थापक प्रिया गुलाटी ने कहा —

“हम महिलाओं को सिर्फ प्रेरित नहीं करना चाहते, बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़ा भी देखना चाहते हैं। यह सीड फंडिंग न केवल इन चार महिलाओं की जीत है, बल्कि पूरे ट्रस्ट और समाज की भी सफलता है।”

वहीं DivIn Pro की संस्थापक जूही गर्ग ने कहा —

“ग्रामीण क्षेत्रों में अपार संभावनाएं छिपी हैं। जब उन्हें सही दिशा और सहयोग मिलता है, तो वे पहाड़ों को भी हिला सकती हैं। तेजस्विनी ट्रस्ट की महिलाएं इसका साक्षात उदाहरण हैं।”

शक्ति का उत्सव बन रही हैं तेजस्विनी की महिलाएं

तेजस्विनी ट्रस्ट की यह सफलता कोई एक दिन की नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष, प्रशिक्षण और सतत सहयोग का परिणाम है। ट्रस्ट द्वारा समय-समय पर आयोजित “शक्ति का उत्सव”, उद्यमिता कार्यशालाएं, फाइनेंशियल लिटरेसी सेमिनार और सहायता समूह सत्रों ने महिलाओं को तैयार किया है कि वे केवल घर नहीं, अब व्यवसाय भी चला सकें।

कार्यक्रम में संगीता वर्मा और सुनीता देवी जैसी वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने भी आयोजन को और प्रेरणादायक बना दिया।

नवाचार, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का संगम

“ग्रामीण हीरो” प्रतियोगिता ने यह साफ कर दिया कि अब महिलाओं को सिर्फ सहानुभूति नहीं, साहस और सहयोग की आवश्यकता है। जब समाज उनका साथ देता है, तो वे केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे समुदाय के लिए मिसाल बन जाती हैं।

यह पहल केवल चार महिलाओं की आर्थिक मदद नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की चिंगारी है, जो आने वाले वर्षों में और महिलाओं को प्रेरित करेगी।

By admin