क्रांतिकारी शालू सैनी एक बार फिर बनी इंसानियत की मिसाल जिस समाज ने बेटी को कूड़ा समझकर फेंका उसी समाज की बेटी क्रांतिकारी शालू सैनी ने अपने हाथों से दी सम्मानजक अंतिम बिदाई
कूड़े के ढेर में पड़ी मिली एक दिन की मासूम… इंसानियत फिर शर्मसार क्रांतिकारी शालू सैनी ने साबित किया है कि बेटियां किसी पर बोझ नहीं होती
क्रांतिकारी शालू सैनी को सूचना मिली कि खतौली थाना क्षेत्र से कूड़े के ढेर में मात्र एक दिन की मृत नवजात बच्ची का शव पड़ा है। जिसे देखकर दिल दहल गया।
वो फूल सी बच्ची, जिसने अभी इस दुनिया को ठीक से देखा भी नहीं था, उसे इस तरह कूड़े में फेंक दिया गया।
सूचना मिलते ही क्रांतिकारी शालू सैनी ने उस मासूम बच्ची को अपने हाथों में लेकर, विधि-विधान से, पूरे सम्मान के साथ धरती माँ की गोद में सुलाया।*क्रांतिकारी शालू सैनी बताया कि वो अब तक 6000 से अधिक लावारिस व बेसहारा शवों को अपना नाम देकर सम्मानजनक अंतिम बिदाई अपने हाथों से कर चुकी लेकिन जब जब उन्होंने किसी नवजात बच्चे का अंतिम संस्कार किया है तब तब उनकी रूह तक कांपी है शालू सैनी का कहना है कि बिटिया किसी पर बोझ बने तो वो हमारे आश्रम में छोड़ आए हम उन्हें खुद पाल पोस कर बनाएंगे शशक्त बेटी
हे भगवान, ऐसी निर्दयी सोच को बदलो।
एक बेटी को कूड़ा नहीं, सम्मान चाहिए।
ॐ शांति। उस नन्ही परी को विनम्र श्रद्धांजलि
— क्रांतिकारी शालू सैनी अध्यक्ष साक्षी वेलफेयर ट्रस्ट संपर्क 8273189764
