चंद्र प्रकाश बुडाकोटी
देहरादून। उत्तराखण्ड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) के प्रबंध निदेशक पी सी. ध्यानी ने आज भारत सरकार की महत्वाकांक्षी रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के अंतर्गत संचालित विभिन्न परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में परियोजनाओं की वर्तमान प्रगति, निर्धारित समय-सीमा, गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों तथा कार्यान्वयन में आ रही चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आरडीएसएस भारत सरकार की एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है, जिसके माध्यम से उत्तराखण्ड के विद्युत वितरण नेटवर्क का आधुनिकीकरण, विद्युत हानियों में कमी, उपभोक्ता सेवाओं में सुधार तथा भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं के अनुरूप सुदृढ़ एवं विश्वसनीय विद्युत व्यवस्था विकसित की जा रही है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों एवं कार्यदायी एजेंसियों से समन्वित प्रयासों के साथ कार्य करते हुए सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सफलतापूर्वक पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान प्रबंध निदेशक ने स्मार्ट मीटरिंग परियोजना की प्रगति की गहन समीक्षा करते हुए परियोजना क्रियान्वयन एजेंसियों मै० अडानी तथा मै० जीनस के कार्यों का मूल्यांकन किया। उन्होंने दोनों एजेंसियों को निर्देशित किया कि परियोजना के सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण किए जाएं तथा कार्यों की गति में और अधिक तेजी लाई जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्मार्ट मीटरिंग परियोजना प्रदेश के विद्युत वितरण तंत्र के आधुनिकीकरण एवं उपभोक्ता सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी स्वीकार्य नहीं होगी। प्रबंध निदेशक ने राज्य के सभी 13 जनपदों में आरडीएसएस के अंतर्गत संचालित लॉस रिडक्शन (Loss Reduction) कार्यों की भी विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने क्षेत्रीय अधिकारियों एवं परियोजना से जुड़े अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक कार्य की नियमित एवं निकट स्तर पर निगरानी सुनिश्चित की जाए तथा सभी स्वीकृत कार्य नवंबर 2026 तक पूर्ण कर लिए जाएं, जिससे विद्युत हानियों में कमी लाने के निर्धारित लक्ष्य समयबद्ध रूप से प्राप्त किए जा सकें। बैठक में बॉर्डर आउट पोस्ट (Border Out Post) एवं वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (Vibrant Village Programme) के अंतर्गत संचालित विद्युत अवसंरचना कार्यों की भी समीक्षा की गई। प्रबंध निदेशक ने निर्देश दिए कि सीमांत एवं दूरस्थ क्षेत्रों में संचालित इन परियोजनाओं का प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि सीमावर्ती गांवों में विश्वसनीय एवं सुदृढ़ विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराई जा सके।
ऋषिकेश के अंडरग्राउंडिंग कार्य दिसंबर तक हो पूरे
ऋषिकेश अंडरग्राउंडिंग परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए एमड़ी यूपीसीएल ने संबंधित अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्था को निर्देशित किया कि परियोजना के सभी कार्य दिसंबर 2026 तक अनिवार्य रूप से पूर्ण किए जाएं। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के पूर्ण होने से ऋषिकेश नगर में विद्युत आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ेगी, तकनीकी व्यवधानों में कमी आएगी तथा शहरी विद्युत अवसंरचना और अधिक सुदृढ़ होगी। बैठक के दौरान प्रबंध निदेशक ने स्पष्ट रूप से कहा कि “कार्य की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा तथा प्रत्येक परियोजना में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।” उन्होंने सभी कार्यदायी संस्थाओं एवं अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप, उच्च गुणवत्ता के साथ तथा सभी सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन करते हुए निष्पादित किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आरडीएसएस भारत सरकार की एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है, जिसके माध्यम से उत्तराखण्ड के विद्युत वितरण नेटवर्क का आधुनिकीकरण, विद्युत हानियों में कमी, उपभोक्ता सेवाओं में सुधार तथा भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं के अनुरूप सुदृढ़ एवं विश्वसनीय विद्युत व्यवस्था विकसित की जा रही है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों एवं कार्यदायी एजेंसियों से समन्वित प्रयासों के साथ कार्य करते हुए सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सफलतापूर्वक पूर्ण करने के निर्देश दिए।
ये अफसर रहे मौजूद
बैठक के दौरान निदेशक (वित्त), अधिशासी निदेशक (तकनीकी), मुख्य अभियन्ता (परियोजना), अधीक्षण अभियन्ता कारपोरेट (अनुबन्ध एवं क्रय-प्रथम), अधिशासी अभियन्ता (सम्बद्ध) प्रबन्ध निदेशक एवं अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित रहे तथा क्षेत्रीय इकाईयों द्वारा Video Conferencing के माध्यम से प्रतिभाग किया गया।
