फर्जी वेबसाइट और हेल्पलाइन से रहें सावधान, साइबर अपराधियों का नया हथकंडा
देहरादून। इंटरनेट और स्मार्टफोन के इस दौर में जहां हर सुविधा एक क्लिक पर उपलब्ध है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी ठगी के नए रास्ते तलाश लिए हैं। अब अपराधी गूगल या अन्य सर्च इंजनों पर नकली वेबसाइट, फर्जी हेल्पलाइन नंबर और डुप्लीकेट पेज बनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि उपभोक्ता जानकारी हासिल करने के चक्कर में ठगों के जाल में फंसकर अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं।
कैसे करते हैं ठगी?
साइबर अपराधी पहले किसी नामी कंपनी, बैंक या सेवा प्रदाता के नाम से फर्जी विज्ञापन या नकली कस्टमर केयर नंबर इंटरनेट पर डाल देते हैं। जब उपभोक्ता गूगल या सोशल मीडिया पर सहायता ढूंढते हैं तो उन्हें यह फर्जी नंबर और वेबसाइट सबसे ऊपर दिखाई देती है। पीड़ित जैसे ही इनसे संपर्क करता है, अपराधी उसकी बैंकिंग जानकारी, ओटीपी या यूपीआई पिन हासिल कर लेते हैं और खाते से पैसे उड़ा लेते हैं।
पुलिस ने दिए बचाव के उपाय
उत्तराखंड पुलिस ने जनता को सतर्क करते हुए साफ कहा है कि—
- किसी भी सेवा या कंपनी की जानकारी केवल आधिकारिक वेबसाइट/मोबाइल ऐप से ही प्राप्त करें।
- गूगल/सोशल मीडिया पर दिखने वाले फर्जी विज्ञापन या हेल्पलाइन नंबरों से बचें।
- किसी भी लिंक पर क्लिक करने या ऑनलाइन भुगतान से पहले दोबारा सत्यापन करें।
- अजनबियों द्वारा भेजे गए लिंक, QR कोड, UPI रिक्वेस्ट को तुरंत नजरअंदाज करें।
- यदि किसी लेन-देन पर संदेह हो तो तुरंत उसे रोकें और जानकारी को क्रॉस-चेक करें।
📞 मदद के लिए कहां करें संपर्क?
- राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर: 1930
- ऑनलाइन शिकायत पोर्टल: cybercrime.gov.in
विशेषज्ञ की राय
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश मामलों में पीड़ित लोग जल्दबाजी या लापरवाही की वजह से ठगे जाते हैं। यदि लोग केवल आधिकारिक स्रोतों का उपयोग करें और किसी भी संदिग्ध लिंक या कॉल से दूरी बनाए रखें तो ठगी से बचा जा सकता है।
