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देहरादून ,6/8/2025 को उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय हर्रावाला के मुख्य परिसर में संस्कृत दिवस के उपलक्ष्य में संस्कृत सप्ताह के प्रथम दिन संस्कृत दिवस कार्यक्रम का शुभारंभ उप परिसर निदेशक डा. नन्द कुमार दाधीच, डा. एस पी सिंह, डा. अमित तमादड्डी, डा. इला तन्ना व डा. प्रदीप सेमवाल, डा. ऋषि आर्य के द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

कार्यक्रम में प्रास्ताविक भाषण करते हुए डा. प्रदीप सेमवाल ने कहा कि संस्कृत भाषा भारत की प्राण भाषा है। संस्कृत हमें जन्म से लेकर मृत्यु पर्यन्त जीवन जीने की कला सिखाती है। संस्कृत एवं संस्कृत साहित्य के कारण भारत विश्वगुरु रहा है । आज विश्व में शांति स्थापित करने के लिए संस्कृत शास्त्रों में निहित ज्ञान बहुत उपयोगी है।

डा. राजीव कुरेले जी ने सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि संस्कृत भाषा का उच्चारण करने से हमारे मन और आत्मा को सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। भाषा का सही उच्चारण ही उसकी महत्ता को प्रकट करता है। संस्कृत साहित्य में निहित ज्ञान मानवीय मूल्यों की वृद्धि करता है।

अपने वक्तव्य में डा. अमित तमादड्डी जी ने कहा कि भाषा अभिव्यक्ति का माध्यम होती है। संस्कृत भाषाओं की जाननी है। हमें अपनी भाषा पर गर्व होना चाहिए।
डा. इला तन्ना जी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि संस्कृत हमारी धरोहर है। इसका संरक्षण हर घर में होना चाहिए। उन्होंने कहा की भाषा को भाषा के माध्यम से पढ़ाने से ही उसका महत्त्व होता है। संस्कृत भाषा को जन भाषा बनाने का आह्वान करते हुए उन्होंने सुमधुर संस्कृत गीत भी प्रस्तुत किया।

अध्यक्षीय भाषण करते हुए डा. नन्द किशोर दाधीच ने ने कहा कि संस्कृत ज्ञान और विज्ञान की भाषा है। आज के युग में ए. आई. के लिए भी संस्कृत सर्वश्रेष्ठ भाषा है। यह भाषा हमें संस्कारों से जोड़ कर रखती है इसलिए हमें यह भाषा अवश्य सीखनी चाहिए।

इससे पूर्व कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की छात्राओं सृष्टि चौहान, आयुषी, खुशी सिंह, सिमरन, मेघा, प्रीति डिमरी, शैलजा ने सरस्वती वंदना, माधवी, निदा, कमल, अमन, सत्यम, अभय, शिवा, विक्रम व सदान ने धन्वंतरि वन्दना, प्रिया, गीता, चक्षु, अंशुल, आयुष व उवेश ने स्वागत गान, खुशी पुरोहित, अंकिता लमगड़िया, दीक्षा बुडलाकोटी ने संस्कृत गीत, महक, शिवांगी भारती, शिवांगी सिंघल व सादिया ने संस्कृत में सुभाषित गान, श्रद्धा ने संस्कृत नृत्य, नौशीन मदीहा, तनीशा, प्रेरणा, एकता, भूमिका, ऋषभ, और अक्षय ने *पर्यावरणं रक्षत* इस नाटक का मंचन किया। कार्यक्रम का सफल संचालन खुशी ढौंडियाल व दीक्षा ने किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सभी विभागों के प्राध्यापक, छात्र एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

By admin